Friday, May 20, 2022
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सरकार का प्रस्ताव किसानों को नहीं मंजूर, कहा- कानून वापसी तक जारी रखेंगे आंदोलन

  • Updated on 1/22/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) को लेकर सरकार और किसानों ने बीच आज में 11वें दौर की वार्ता हुई। जिसमें एक बार फिर किसानों ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। सरकार ने इस बार  किसानों को सम्झौता करने के लिए कहा और अपनी तरफ से लगभग दो साल तक नए कृषि कानून को लागू न करने या टालने का प्रस्ताव रखा, लेकिन किसान संगठन द्वारा इस प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया गया।

किसानों ने कहा है कि वो नए कानून टालने के लिए बल्कि उन्हें वापस लेने की मांग कर रहे हैं और जब तक ऐसा नहीं हो जाता तब तक किसान आंदोलन जारी रहेगा। 

किसान संगठनों ने 11वें दौर की वार्ता से पहले खारिज किए मोदी सरकार के प्रस्ताव 

जिद्द पर अड़े किसान 
इससे पहले सरकार तीनों कानूनों को डेढ़ साल तक के लिए लागू न करने और आवश्यक संशोधन करने की बात कह चुकी है। इसके बाद भी किसान विरोध समाप्त करने को तैयार नहीं है। किसान अब भी कानून पूरी तरह से रद्द करने मांग पर अड़े हुए हैं। हालांकि बैठक अभी भी चल रही है लेकिन किसानों ने साफ कर दिया है कि वो बिना कानून वापस लिए आंदोलन खत्म करने वाले नहीं है। 

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ट्रैक्टर रैली की जारी तैयारियां 
वहीं किसान 26 जनवरी को प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली की तैयारियों में भी जुटे हैं। 26 जनवरी की परेड के लिए हरियाणा पंजाब और चंडीगढ़ से ट्रैक्टर टीकरी बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं। 26 जनवरी को ये ट्रैक्टर आउटर रिंग रोड पर पहुंचेंगे। परेड के लिए ट्रैक्टरों को तैयार किया जा रहा है। इनको झंडों और पोस्टरों से सजाने का काम जारी है। इतना ही नहीं ट्रैक्टर पर देशभक्ति के गीत बजाने की व्यवस्था भी की जा रही है। 

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सरकार के सामने खड़ा हुआ सवाल 
किसानों को नए-नए प्रस्ताव देने वाली मोदी सरकार के सामने अब सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, इस मामले पर पीछे हटना सरकार को अपनी आन की बात लग रही है इसलिए वो पीछे हटने से बेहतर किसानों को प्रस्ताव देना सही समझ रही है। लेकिन कानून के अनुसार सरकार जो प्रस्ताव रख रही है वो उन्हें बस की बात ही नहीं है। इस बारे में कई विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं उनका कहना है कि सरकार अपने अधिकार क्षेत्र से आगे की बात कर रही है।

जानकार मानते हैं कि कानून रोकना या उसके टालना सरकार के हाथ में नहीं है यह सिर्फ कोर्ट या संसद के हाथ में है। एक बार कानून पास होने के बाद वो सरकार के हाथ के बाहर हो जाता है। 

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