Saturday, Jan 22, 2022
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किसान यूनियनों ने केंद्र के कृषि कानूनों में संशोधन के प्रस्ताव को ठुकराया

  • Updated on 12/23/2020


नई दिल्ली/टीम डिजिटल। आंदोलनरत किसान यूनियनों (Farmers Leaders) ने केंद्र की मोदी सरकार के कृषि कानूनों में संशोधन के प्रस्ताव को फिर से ठुकरा दिया है। किसानों नेताओं ने साफ कहा है कि बिना कानूनों के रद्द किए वार्ता नहीं हो सकती है। बता दें कि केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर किसान यूनियनों ने आज फैसला लिया है। किसान तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग पर अडिग हैं। 

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किसान नेता कुलवंत सिंह संधू ने साफ कर दिया है कि किसानों का आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। यह फैसाल पंजाब के 32 किसान यूनियनों ने बैठक की में लिया गया है। संधू ने इससे पहले कहा था कि वे ब्रिटेन के सांसदों को भी पत्र लिखेंगे और उनसे आग्रह करेंगे कि वे 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल नहीं होने के लिए अपने प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन पर दबाव डालें। जॉनसन अगले महीने होने वाले कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे।     

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केंद्रीय कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने रविवार को 40 किसान यूनियनों के नेताओं को पत्र लिख कर कहा था कि वे कानूनों में संशोधन के उसके पहले के प्रस्ताव पर अपनी चिंताओं को स्पष्ट करें और अगले दौर की बातचीत के लिए किसी सुविधाजनक तारीख का चुनाव करें ताकि चल रहा आंदोलन जल्द से जल्द समाप्त हो सके।

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उल्लेखनीय है कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की अपनी मांग से पीछे हटने से किसान संगठनों के इनकार करने के बाद बने गतिरोध के बीच नौ दिसंबर को छठे दौर की वार्ता रद्द हो गयी थी। 

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