Wednesday, Dec 01, 2021
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वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए गृहमंत्री ने किसानों को सुना, दिया भरोसा

  • Updated on 12/8/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों के भारत बंद के बाद केंद्र सरकार के रुख में कुछ नरमी नजर आ रही है। सरकार किसानों का भरोसे जीतने की कोशिश में जुटी है। शाह ने कृषि कानूनों को वापस लेने से इनकार कर दिया है, लेकिन सरकार की ओर से लिखित प्रस्ताव देने को राजी हो गए हैं। यह आज की कृषि मंत्री की बैठक में तय हो सकता है।

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13 किसान नेता- राकेश टिकैत, हनन मोल्ला, शिव कुमार कक्का जी, रूलदू सिंह, बोध सिंह मानसा, गुरनाम सिंह चढूनी, जगजीत सिंह दलेवाल, बलवीर सिंह राजेवाल, कुलवंत सिंह संधू, मंजीत सिंह राय, बूटा सिंह बुर्जगिल, हरिंदर सिंह लखोवाल और दर्शन पाल शाम करीब 7 बजे तय समय पर शाह के आवास पर पहुंचे, जहां से उन्हें आईसीएआर के गेस्ट हाउस, पूसा कृषि इंस्टीट्यूट ले जाया गया।

वहीं से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए किसानों की शाह से बात हुई। हालांकि इस एक्सरसाईज से किसान नेता रूलदू सिंह नाराज हो गए। वे पूसा इंस्टीट्यूट जाने की बजाए सिंघू बार्डर वापस चले गए। सूत्रों का कहना है कि शाह ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि इन तीनों कानूनों से किसानों के हितों को कोई नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
 

शाह की गिने चुने किसानों से वार्ता से उभरा असन्तोष

गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक को लेकर किसान संगठनों के बीच असंतोष के स्वर सुनाई देने लगा है। भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) ने निर्धारित वार्ता से एक दिन पहले शाह के साथ किसानों की बैठक को लेकर सवाल उठाया। प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों में यह सबसे बड़ा संगठन है।     सोशल मीडिया पर साझा की गई एक पोस्ट में जोगिन्दर सिंह उगराहां ने कहा कि आधिकारिक वार्ता से पहले वार्ता की कोई जरूरत नहीं थी। उगराहां को इस बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया था।

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We are talking to our people on where the meeting is to be held: Rakesh Tikait, Spokesperson, Bhartiya Kisan Union on being asked about the meeting with Union Home Minister Amit Shah https://t.co/dKjmCe3cFl pic.twitter.com/ZNVBr9YM5i

सूत्रों के मुताबिक शाह की बैठक किसान नेताओं से अलग-अलग चल रही है। इसलिए कुछ किसान नेताओं को अभी तक बैठक के बारे में पता ही नहीं है। किसान नेता मुलाकात का एक घंटे से इंतजार कर रहे थे। लेकिन, गृह मंत्री के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली। खास बात यह है कि कल किसान नेताओं की केंद्र सरकार के बैठक तय है, लेकिन इससे पहले ही शाह ने सक्रियता दिखाते हुए बातचीत करने का मन बनाया है। 

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उधर, किसान नेता रुरदू सिंह मनसा ने सिंघु बॉर्डर पर मीडिया से बातचीत में कहा है कि केंद्र सरकार हमारे ‘भारत बंद’ के आगे झुकी है। हम बुराड़ी नहीं जाना चाहते, हमें रामलीला मैदान जाने की अनुमति दी जाए, क्योंकि हम दिल्ली और हरियाणा के लोगों को परेशान नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने साफ कहा कि कृषि कानून किसानों के हित में नहीं हैं। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने भी साफ किया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज हमें बैठक के लिए बुलाया है, हम इसमें भाग लेंगे।

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उधर भारत बंद के समर्थन में मंगलवार को देश के कई हिस्सों में दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे और परिवहन पर असर पड़ा। प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरे और ट्रेन समेत यातायात को बाधित किया। बंद से आपात सेवाओं और बैंकों को दूर रखा गया है। अखिल भारतीय बंद को अधिकतर विपक्षी दलों और कई ट्रेड यूनियनों का समर्थन मिला है। पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों और किसानों के प्रदर्शन का केंद्र बनी दिल्ली में बंद का असर दिखा। 

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बंद को देखते हुए देशभर में सुरक्षा बढ़ा दी गयी है। कई जगहों पर प्रदर्शन का असर दिखा। दिल्ली की सीमाओं पर हजारों किसान पिछले 11 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा में प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर ट्रेनें रोकीं। किसान संगठनों द्वारा आहूत‘भारत बंद’का मंगलवार को राजस्थान के अनेक इलाकों में शुरुआती असर मिला जुला रहा। प्रदेश की राजधानी जयपुर में ‘मंडियां’ बंद थीं, लेकिन दुकान खुली थीं। प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की खबरें हैं। 

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देश के अधिकतर हिस्सों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अधिकतर मुख्य बाजार खुले रहे लेकिन ऐप आधारित कैब सेवाएं सड़कों पर नहीं दिखी। हालांकि, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी द्वारा दिल्ली पुलिस पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नजरबंद करने का आरोप लगाए जाने के बाद तनाव पैदा हो गया था। 

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आप के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया, ‘‘ गृह मंत्रालय के निर्देश पर, दिल्ली पुलिस ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को सिंघू बॉर्डर पर किसानों से मिलने के बाद से ही नजरबंद कर दिया है। किसी को भी उनके आवास पर जाने या वहां से किसी को बाहर आने की अनुमति नहीं है। हमारे विधायकों की पिटाई की गई। वहां कई अवरोधक लगाए गए हैं और घरेलू सहायिका को भी घर के अंदर नहीं जाने दिया जा रहा।’’ 

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हालांकि, दिल्ली पुलिस ने पार्टी के दावों को खारिज किया है। ‘भारत बंद’ के समर्थन में शहर में कुछ ऑटो और टैक्सी संघों ने भी भाग लिया और सड़कों पर वाहनों को नहीं उतारने का फैसला किया, वहीं कुछ ने हड़ताल से दूरी बनाई। ‘बंद’ के तहत किसान यूनियनों ने मंगलवार सुबह 11 बजे से दिन में तीन बजे तक चक्का जाम करने के दौरान देशभर में राजमार्गों को बाधित करने और टोल प्लाजा को घेरने की चेतावनी दी थी। नये कानून को लेकर जारी गतिरोध पर बुधवार को केंद्र सरकार की किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता होने वाली है। 

अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) के महासचिव हन्नान मौला ने कहा कि ‘भारत बंद’ किसानों की ताकत दिखाने का एक जरिया है और उनकी जायज मांगों को देशभर के लोगों का समर्थन मिला है।      मौला ने कहा, ‘‘ हम तीनों कानूनों की पूरी तरह वापसी की अपनी मांग पर अडिग हैं और किसी तरह के संशोधनों पर राजी नहीं होंगे। ये ऐसे कानून हैं, जिसमें संशोधन से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ’’ बंद के मद्देनजर पंजाब में अनेक स्थानों पर दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे।  

राज्य में पेट्रोल डीलरों ने भी बंद के समर्थन में पेट्रोल पंप बंद रखे। राज्य में ईंधन भरने वाले पंपों की संख्या 3,400 से अधिक है। पड़ोसी राज्य हरियाणा में विपक्षी दल कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोक दल ने भारत बंद को समर्थन दिया। दोनों ही राज्यों में सुबह से ही किसान राजमार्गों तथा अन्य महत्वपूर्ण मार्गों पर एकत्रित होने लगे थे। हरियाणा पुलिस ने यात्रा परामर्श जारी किया है जिसमें कहा है कि लोगों को कई मार्गों एवं राजमार्गों पर दोपहर 12 बजे से अपराह्न तीन बजे तक यातायात की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। 

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस और वाम दलों के साथ ‘भारत बंद’ का समर्थन किया है। प्रदर्शनकारियों ने राज्य में कई स्थानों पर रेल पटरियों को जाम किया और सड़कों पर धरना दिया। बंद का असर राज्य में देखने को मिला, जहां निजी वाहन सड़कों से नदारद रहे और बस, टैक्सी जैसे सार्वजनिक वाहनों का परिचालन सामान्य से कम है। किसानों के ‘भारत बंद’ के आह्वान का झारखंड में मंगलवार को मिला-जुला असर दिखा। राज्य में लगभग सभी सरकारी कार्यालय खुले रहे, लेकिन निजी संस्थान एवं दुकानें आंशिक तौर पर बंद रहीं। 

राज्य में स्थानीय यातायात अधिकतर सामान्य है, लेकिन अंतरराज्यीय यातायात ठप है। छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी दल कांग्रेस ने भारत बंद का समर्थन किया है। सत्ताधारी दल के नेता और कार्यकर्ता बंद को सफल बनाने के लिए सड़क पर निकले तथा लोगों से समर्थन का अनुरोध किया। मध्य प्रदेश में ‘भारत बंद’ के समर्थन में प्रदर्शनकारियों ने राज्य के होशंगाबाद जिले के सिवनी-मालवा क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया। क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की। 

महाराष्ट्र में मुम्बई और अधिकतर हिस्सों में उपनगरीय ट्रेनों और बसों सहित सार्वजनिक परिवहन सेवाएं मंगलवार को किसानों द्वारा आहूत ‘भारत बंद’ के बावजूद लगभग सामान्य रहीं। महाराष्ट्र के अनेक हिस्सों में कृषि उपज विपणन समितियां (एपीएमसी) बंद रहीं। भाजपा शासित गोवा में मंगलवार सुबह बाजार खुले रहे और सार्वजनिक परिवहन भी सामान्य रहा। शैक्षणिक संस्थानों का कामकाज भी सामान्य है। बाजार खुले हैं और सार्वजनिक परिवहन भी अन्य दिनों की तरह सामान्य है। 

असम में हजारों प्रदर्शनकारियों ने ‘भारत बंद’ में हिस्सा लिया। कांग्रेस और वाम दलों समेत 14 विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने बंद को समर्थन दिया है। हालांकि, राज्य में अधिकतर कार्यालयों में कामकाज सामान्य रहा। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। राज्य में पेट्रोल पंपों के संघों द्वारा बंद को समर्थन देने के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित रही। वहीं, हिमाचल प्रदेश में बंद का अधिक असर नहीं दिखा। राज्य में अधिकतर दुकानें, कारोबारी संस्थान खुले रहे। हालांकि, कांग्रेस और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीआईटीयू) ने राज्य की राजधानी शिमला एवं अन्य जिलों में अलग-अलग धरना दिया। 

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