Sunday, Sep 26, 2021
-->
farmers-in-haryana-protested-targeting-programs-of-bjp-leaders-rkdsnt

हरियाणा में किसानों ने भाजपा नेताओं के कार्यक्रमों को निशाना बनाते हुए किया प्रदर्शन

  • Updated on 7/11/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। किसानों ने रविवार को हरियाणा में विभिन्न स्थानों पर भाजपा नेताओं के कार्यक्रमों को निशाना बनाते हुए विरोध प्रदर्शन किया और तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग के साथ केंद्र के खिलाफ नारे लगाए। फतेहाबाद में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा लगाए गए अवरोधकों को हटा दिया और उस स्थान की ओर बढऩे का प्रयास किया जहां हरियाणा के सहकारिता मंत्री बनवारी लाल और सिरसा से सांसद सुनीता दुग्गल पार्टी के एक कार्यक्रम में भाग ले रहे थे।  

चुनावी हिंसा पर अखिलेश बोले- भाजपा से बड़ी गुंडागर्दी वाली पार्टी कोई और नहीं हो सकती

पुलिस ने कहा कि जब प्रदर्शनकारियों को कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश करने से रोका गया तो उनमें से कुछ ने अवरोधक हटा दिए और नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे लिए हुए थे। हालांकि उन्हें कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंचने दिया गया। किसानों ने झज्जर में भी प्रदर्शन किया जहां प्रदेश भाजपा प्रमुख ओपी धनखड़ एक पार्टी कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे। अपने हाथों में काले झंडे लिए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे भाजपा या उसकी सहयोगी जननायक जनता पार्टी (जजपा) को तब तक कार्यक्रम नहीं करने देंगे जब तक कि विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाता। 

माकपा बोली- अगर सार्वजनिक निवेश नहीं बढ़ा तो भारी-भरकम मोदी कैबिनेट का फायदा नहीं

सिरसा में भी काले झंडे लिए किसान एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं, अंबाला में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी उस समय अंबाला-साहा मार्ग पर एकत्र हो गए, जब उन्हें पता चला कि भाजपा की जिला इकाई एक कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इस बीच, हरियाणा भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी ने रविवार को पंजाब के गुरदासपुर में पत्रकारों से बातचीत में कि दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन सात महीने से अधिक समय से चल रहा है लेकिन सरकार उनकी नहीं सुन रही है। 

Twitter ने भारत के लिए नियुक्त किया शिकायत अधिकारी, जारी की पहली रिपोर्ट

उन्होंने गुरदासपुर में डेरा बाबा नानक से सिंघू बॉर्डर आंदोलन स्थल तक विभिन्न वाहनों पर किसानों के एक मार्च का नेतृत्व किया। चढूनी ने कहा, ‘‘यह आंदोलन कई महीनों से चल रहा है, लेकिन केंद्र किसानों की बात नहीं सुन रहा है। भाजपा नीत सरकार को अगर यह लगता है कि यह आंदोलन समाप्त हो जाएगा, तो वह गलत समझ रही है। वास्तव में, यह अधिक ताकत हासिल कर रहा है और किसान तभी आराम करेंगे जब ये कानून रद्द हो जाएंगे।'

BPCL निजीकरण और रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर मोदी सरकार ले रही कानूनी राय


सिंघू बॉर्डर के नजदीक करंट लगने से एक किसान की मौत 
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सिंघू बॉर्डर के नजदीक पंजाब के एक किसान की करंट लगने से मौत हो गई। पिछले सात महीने से किसान सिंघू बॉर्डर पर केंद्र के तीन कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए जमा हैं। सोहन सिंह (42) का शव सिंघू बॉर्डर के समीप बिजली के एक ट्रांसफर्मर के नजदीक से मिला है। यह इलाका हरियाणा के सोनीपत जिले के कुंडली में पड़ता है।

कुंडली पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘ करंट लगने से उनकी मौत हो गई। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है।’’ सिंह किसानों के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए पिछले महीने यहां आए थे। मुख्य तौर पर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान बड़ी संख्या में दिल्ली की सीमाओं पर पिछले साल नवंबर से ही जमा हैं। ये किसान केंद्र के तीन नए कृषि क़ानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। 
 

 

 

 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.