Saturday, Dec 03, 2022
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farmers leaders says delhi borders look like international border rkdsnt

रिहाना के समर्थन से उत्साहित किसान मोर्चा ने 'कील बंदी' पर बोला हमला

  • Updated on 2/3/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बुधवार को आरोप लगाया कि दिल्ली की सरहदें Þअंतरराष्ट्रीय सीमाओंÞ जैसी लग रही हैं और अधिकारी अस्थायी दीवार बना रहे हैं, बड़ी-बड़ी कीलें सड़कों पर गाड़ रहे हैं और कांटेदार बाड़ लगा रहे हैं। वहीं अधिकारियों ने कानून एवं व्यवस्था का हवाला देकर अपने इस कदम का बचाव किया है। सिंघू (दिल्ली-हरियाणा) बॉर्डर, गाजीपुर (दिल्ली-उत्तर प्रदेश) बॉर्डर, और टीकरी (दिल्ली-हरियाणा) बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन चल रहा है जहां गणतंत्र दिवस पर हुई ङ्क्षहसा के बाद से सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और विभिन्न पाबंदियां लगाई गई हैं। 

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26 जनवरी को हुई ङ्क्षहसा में 500 से ज्यादा पुलिस कर्मी जख्मी हुए थे और एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई थी। गणतंत्र दिवस पर किसानों को ट्रैक्टर परेड निकालनी थी लेकिन सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने पहले से तय रास्ते का उल्लंघन कर पुलिस के साथ संघर्ष किया और लाल किले को घेर लिया तथा ध्वज स्तंभ पर चढ़ गए। गाजीपुर और टीकरी बॉर्डर पर शिपिंग कंटेनर लगाए गए हैं, अवरोधकों के बीच में सरिए लगाए गए हैं तथा सीमेंट के खंड रखे गए हैं और कांटेदार तारें लगाई गई हैं, बड़े-बड़े पत्थर रखें गए हैं और लौहे की कीलों को सड़क पर गाड़ा गया है ताकि लोग दिल्ली या प्रदर्शन स्थल तक न पहुंच पाएं। 

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किसान नेता कुलवंत सिंह संधू ने कहा, 'प्रदर्शन स्थल अंतरराष्ट्रीय सीमा जैसे दिख रहे हैं। ऐसा लग रहा है मानो कि हम पाकिस्तान से आए हैं। एक ओर वे (सरकार) हमसे बात करना चाहते हैं और दूसरी ओर वे (शहर से) हमारा संपर्क तोडऩे के लिए सबकुछ कर रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'यह सरकार की बेचैनी को दिखाता है।' दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा और दिल्ली हरियाणा सीमा पर लौहे के भारी बैरिकेड के अलावा, कंक्रीट के खंड, खाई खोदना, रास्ता रोकने के लिए डीटीसी की बसों का इस्तेमाल करने जैसे उपाय किए गए हैं। 

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जमहूरी किसान सभा के महासचिव संधू ने दावा किया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवरोधक लगाना और लोगों व वाहनों की आवाजाही रोकना आम लोगों को 'परेशान' करने की अधिकारियों की रणनीति है ताकि उन्हें प्रदर्शन कर रहे किसानों के खिलाफ खड़ा किया जा सके। उन्होंने कहा, 'लेकिन किसान हिलेंगे नहीं। वे हमारे रास्ते में कितने ही अवरोध पैदा कर दें। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।' संधू ने कहा, 'वे (अधिकारी) नहीं जानते हैं कि स्थानीय लोग एवं पूरे देश के लोग हमारे आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। दुखद है कि सरकार ने गाकाीपुर की घटना से सबक नहीं सीखा।' 

सिंघू बॉर्डर पर बीते 15 दिनों से डेरा डाले हुए 26 वर्षीय मनदीप सिंह भी संधू की भावनाओं से सहमत नजर आए और कहा कि ताकत दिखाने और सड़कों को अवरुद्ध करने से स्थानीय लोगों को परेशानी होगी न कि प्रदर्शनकारी किसानों को।' पंजाब के लुधियाना जिले के रहने वाले सिंह ने कहा, 'ये अवरोध हमारी भावना को कम नहीं कर सकते हैं या हमारे आंदोलन को प्रभावित नहीं कर सकते हैं। हम अपने नेताओं के निर्देशों का पालन कर रहे हैं, जिन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि हम अपने संबंधित स्थानों पर रहें। हम न आगे बढ़ेंगे न पीछे जाएंगे। आखिरकार स्थानीय लोगों को इससे परेशानी होगी न कि हमें।'

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प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि कई स्थानीय लोग उनकी मदद कर रहे हैं। चाहे अपने घरों से बिजली देना हो या महिला प्रदर्शनकारियों को अपने घरों के शौचालयों का इस्तेमाल करने की इजाजत देना हो या फिर अपनी दुकानों के वाईफाई कनेक्शन को साझा करना हो। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने प्रदर्शन स्थलों पर इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया है। प्रदर्शन स्थलों पर हजारों सुरक्षा र्किमयों को तैनात किया गया है। 

दुनिया की नामचीन हस्तियों का समर्थन देना गर्व की बात: मोर्चा
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बुधवार को कहा कि दुनिया की नामचीन हस्तियों द्वारा किसान आंदोलन को समर्थन देना गर्व की बात है लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत सरकार उनका दर्द नहीं समझ रही है। इससे पहले अंतरराष्ट्रीय पॉप स्टार रिहाना और पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने किसान आंदोलन को समर्थन देते हुए ट््वीट किया था। 

एसकेएम के नेता दर्शन पाल की ओर से जारी एक वक्तव्य में कहा गया, च्च्एक तरफ यह गर्व का विषय है कि दुनिया की नामचीन हस्तियां किसान आंदोलन का समर्थन कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत सरकार किसानों का दर्द नहीं समझ रही है और कुछ लोग तो शांतिपूर्ण किसानों को आतंकवादी बता रहे हैं।’’ मोर्चा की ओर से यह भी दावा किया गया कि आंदोलन हर दिन तेज होता जा रहा है। 

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वक्तव्य में कहा गया, च्च्उत्तर प्रदेश में किसान महापंचायतों में बड़ा समर्थन मिलने के बाद किसानों ने मध्य प्रदेश के डबरा और फूलबाग, राजस्थान के मेहंदीपुर और हरियाणा के जींद में महापंचायत आयोजित की। आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में किसान दिल्ली आएंगे।’’ 

वक्तव्य में कहा गया कि शाहजहांपुर बॉर्डर पर प्रतिदिन राजस्थान और पंजाब से किसान आ रहे हैं। वक्तव्य में मोर्चा की ओर से कहा गया कि पलवल बॉर्डर पर किसानों ने पुन: धरना शुरू कर दिया है और मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से कई किसान आने वाले दिनों में आंदोलन में शामिल होंगे।  

 

 

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