Friday, Jul 30, 2021
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farmers of villages adjacent to tikri border in support of farm laws kmbsnt

टीकरी बॉर्डर से सटे गांवों के किसान आए कृषि कानूनों के समर्थन में, कही ये बात

  • Updated on 12/17/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) के विरोध में पंजाब, हरियाणा, यूपी समेत कई राज्यों से किसान टीकरी बॉर्डर (tikri border) पर आकर धरना दे रहे हैं। वहीं टीकरी बॉर्डर से सटे गांवो के किसान कृषि कानूनों का समर्थन कर रहे हैं। इन किसानों का कहना है कि विरोध करने वाले किसानों को टीकरी बॉर्डर छोड़कर बुराड़ी मैदान में जाना चाहिए जहां पर सरकार ने उन्हें  जगह अलॉट की है। 

इन किसानों का मानना है कि आंदोलन कर रहे किसानों को नए कृषि कानूनों की जानकारी ही नहीं है। वो विपक्षी दलों के भड़कावे में आकर विरोध कर रहे हैं। यहां के लोग आंदोलन के कारण रास्ता ब्लॉक होने से परेशान है। इन लोगों को आवाजीह में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 

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खरीदारी के लिए बहादुरगढ़ जाते हैं टीकरी बॉर्डर के लोग
दरअसल, यहां के रहने वाले लोग सामान की खरीददारी के लिए हरियाणा के बहादुरगढ़ जाते हैं। वहीं दिल्ली में इनका नजदीकी बाजार नांगलोई है। बहादुरगढ़ के मुकाबले नांगलोई की दूरी यहां से ज्यादा होने के कारण ये लोग हर दिन बहादुरगढ़ जाते हैं। जब से आंदोलन कर रहे किसानों ने यहां धरना शुरू किया है तब से इन लोगों को बहुत परेशानी का सामना करना  पड़ रहा है।  

बता दें कि हाड कंपा देने वाली ठंड में भी किसान लगातार विरोध धरने पर बैठे हैं। वहीं अब महिलाओं ने भी कमान संभाल ली है। यूपी गेट और चिल्ली बॉर्डर पर महिलाएं अपने बच्चों के साथ पहुंच रही हैं। महिलाओं का कहना है कि जब तक सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती तब तक हम यहां से नहीं हटेंगे। 

किसानों की दुर्दशा से निराश संत बाबा राम सिंह ने खुदकुशी, छोड़ा सुसाइड नोट

संत बाबा रामसिंह ने खुद को गोली मारकर खुदकुशी
वहीं किसान आंदोलन के समर्थन में बुधवार को संत बाबा रामसिंह ने खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली है। रामसिंह करनाल के पास नानकसर गुरुद्वारा साहिब से ताल्लुक रखते थे। बता दें कि उन्होंने बाकायदा सूसाइड नोट छोड़ा है। जब पहले आए थे तब दुख के साथ कुछ लिखा था, लेकिन मरने से पहले उन्होंने दूसरी चिटठी लिखी। किसानों का दुख देखा, अपना हक लेने कि लिए सड़कों पर भटक रहे हैं, बहुत दिल दुखा है, सरकार न्याय नहीं दे रही, जुल्म है, जुल्म करना पाप है, जुल्म सहना भी पाप है। किसी ने किसानों के हक में, और जुल्म के खिलाफ कुछ किया, किसी ने कुछ किया, कईयों ने सम्मान वापस किए, पुरस्कार वापिस करके रोष जताया, दास किसानों के हक में सरकारी जुल्म के रोष में आत्मदाह करता है, यह जुल्म के खिलाफ आवाज है और कीर्ति किसान के हक में आवाज है। वाहे गुरु जी का खालसा वाहे गुरु जी की फतेह।

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