Monday, Apr 12, 2021
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किसान संगठनों ने 4 जनवरी की वार्ता विफल होने पर चेताया, बनाई रणनीति

  • Updated on 1/1/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। तीन नए कृषि कानूनों को रद्द करने और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दिए जाने की अपनी मांगों पर दृढ़ किसान यूनियनों ने शुक्रवार को कहा कि अगर सरकार चार जनवरी को हमारे पक्ष में फैसला नहीं लेती है तो वे कड़े कदम उठाएंगे। सिंघू बोर्डर पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने ने अपनी मुख्य मांगों के पूरा नहीं होने पर कदमों की चेतावनी दी। 

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उन्होंने कहा कि सरकार के साथ अब तक हुई बैठकों में किसानों द्वारा उठाए गए मुद्दों में से केवल पांच प्रतिशत पर चर्चा हुई है। किसान नेता विकास ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘अगर सरकार के साथ चार जनवरी की बैठक में गतिरोध दूर नहीं होता है तो हम हरियाणा में सभी मॉल, पेट्रोल पंपों को बंद करने की तारीखों की घोषणा करेंगे।' 

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स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि हरियाणा-राजस्थान सीमा पर शाहजहांपुर में प्रदर्शन कर रहे किसान भी राष्ट्रीय राजधानी की ओर आगे बढ़ेंगे। एक अन्य नेता युद्धवीर सिंह ने कहा कि अगर अगले दौर की बातचीत में कोई ठोस फैसला नहीं हुआ तो छह जनवरी को ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा। बुधवार को छठे दौर की औपचारिक वार्ता में सरकार और किसान संगठनों के बीच बिजली की दरों में वृद्धि और पराली जलाने पर जुर्माना को लेकर किसानों की चिंताओं के हल के लिए कुछ सहमति बनी। लेकिन तीन कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी के मुद्दों पर गतिरोध कायम रहा। 

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तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हजारों किसानों के 41-सदस्यीय प्रतिनिधि समूह और तीन केंद्रीय मंत्रियों के बीच वार्ता के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि चार विषयों में से दो मुद्दों पर पारस्परिक सहमति के बाद 50 प्रतिशत समाधान हो गया है और शेष दो मुद्दों पर चार जनवरी को दोपहर दो बजे चर्चा होगी। 

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कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से हजारों किसान राष्ट्रीय राजधानी की अलग-अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन में ज्यादातर किसान पंजाब और हरियाणा के हैं। सरकार का कहना है कि नए कानूनों से कृषि क्षेत्र में सुधार होगा और किसानों की आमदनी बढ़ेगी लेकिन प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों को आशंका है कि नए कानूनों से एमएसपी और मंडी की व्यवस्था ‘कमजोर’ होगी तथा किसान बड़े कारोबारी घरानों पर आश्रित हो जाएंगे। 

आंदोलनकारी किसानों ने अलाव, लोक गीत से किया नववर्ष का स्वागत
केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली-नोएडा सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने शुक्रवार को नए साल का स्वागत अलाव, लोक गीत, खीर और अपने स्वास्थ्य की जांच के साथ की। भारतीय किसान यूनियन (भानू) और भारतीय किसान यूनियन (लोक शक्ति) के सदस्य दिसंबर के पहले सप्ताह से ही क्रमश: चिल्ला बोर्डर और दलित प्रेरणा स्थल पर डटे हुए हैं। 

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उत्तर प्रदेश में खासा प्रभाव रखने वाले दोनों संगठन संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल नहीं हैं जिसके तहत 40 किसान संगठन नए कानूनों के विरोध में दिल्ली के सिंघू, टीकरी और गाजीपुर बोर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि दोनों संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन किया है। बीकेयू (लोक शक्ति) से जुड़े दर्जनों किसानों ने दलित प्रेरणा स्थल पर नए साल का स्वागत किया। उन्होंने भीषण सर्दी से बचने के लिए अलाव का सहारा लिया और लोक गीतों का आनंद लिया। 

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इस धड़े के प्रवक्ता शैलेश कुमार गिरी ने कहा, ‘‘दिन में हमने अपने समर्थकों और सदस्यों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था की थी, उनमें से कुछ ने बेचैनी और परेशानी होने की शिकायत की थी। उसके बाद नए साल के मौके पर हम सब के लिए खीर की व्यवस्था की गयी।’’ उधर चिल्ला बोर्डर पर बीकेयू (भानू) के 11 सदस्यों ने नए कानूनों के विरोध में उपवास रखा। इस दौरान धड़े के प्रमुख ठाकुर भानु प्रताप सिंह सहित कई अन्य लोग भी प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहे।      

 

 

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