Friday, Jun 18, 2021
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किसान आंदोलन को गलत तरीके से पेश कर चीन-पाकिस्तान फैला रहे नफरत का प्रोपेगेंडा

  • Updated on 12/10/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देश में जारी किसान आंदोलन (Farmers Protest) को सोशल मीडिया में गलत तरीके से पेश करते हुए चीन और पाकिस्तान (Pakistan) भारत को बदनाम करने की नापाक साजिशों में जुटे हैं। आंदोलन के दौरान पुलिस और किसानों की झड़प की तस्वीरें को एक अलग एंगल से पेश करने की कोशिश की जा रही है, जिससे ये नेरेटिव सेट हो जाए कि भारत में अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार किया जाता है। 

सोशल मीडिया पर चीनी नाम से कई फर्जी अकाउंट्स के जरिए भी ऐसी ही तस्वीरें शेयर की जा रही हैं। जिसमें आंदोलनरत किसानों को धरना स्थल से खदेड़ती पुलिस की तस्वीर है। पाकिस्तानी अकाउंट्स से ्दो तरह की तस्वीरें शेयर की जा रही हैं। जिसमें एक ओर भारतीय किसानों के आदंलोन के दौरान किसानों और पुलिस की झड़प की तस्वीर तो दूसरी ओर पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख के साथ एक सिख सैनिक की मुस्कुराती तस्वीर शेयर की जा रही है। 

जिन्ना की टू नेशन थ्योरी की दुनिया भर में प्रशंसा का दावा
इस तस्वीर के साथ लिखा जा रहा है कि भारत और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ किस तरह का व्यवहार होता है ये तस्वीरें उसका अंतर बताती हैं। एक पाकिस्तानी यूजर ने भी इसी प्रकार की एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है कि बहुत जल्द दुनिया जिन्ना की टू नेशन थ्योरी की प्रशंसा करेगी। 

एक यूजर ने खालिस्तान की मांग करने वाले सिखों की तस्वीर के साथ लिखा है कि 'अब भारतियों को पता चलेगा कि जिन्ना कितने सही थे। हम सिखों के साथ हैं।' वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा है कि 'मोदी शर्म करो, भाजपा सरकार किसानों के साथ कितना खराब व्यवहार कर रही है। 30 मिलियन सिख हिंदुत्व विचारधारा के खिलाफ खड़े हैं और आजाद खालिस्तान की मांग कर रहे हैं। 

 

एक यूजर ने लिखा है कि एक सिख नेता इमरान खान से एक साक्षात्कार के दौरान इस्लामाबाद में खालिस्तान दूतावास खोलने की अनुमति देने के लिए अनुरोध किया। मुझे लगता है कि पाकिस्तान के लिए यह समय है कि वह पूरी तरह से खालिस्तान आंदोलन की सुविधा दे, लेकिन गुप्त तरीके से। 

भारत के खिलाफ नफरत का प्रोपेगेंडा चलाने की साजिश
ऐसे ही कई भड़काऊ पोस्ट के जरिए पाकिस्तान सोशल मीडिया पर भारत के खिलाफ नफरत का प्रोपेगेंडा चला रहा है। लेकिन शायद वो भारत की मिट्टी की तासीर को नहीं जानते, जिसमें आजादी के इतने सालों में कई उतार-चढ़ाव देखने के बाद भी नफरत का बीज नहीं पनप सका। आपस में भिन्नता को हम भारतीय त्योहारों के रूप में मनाते हैं, और रही किसानों की बात तो ये भारत का आंतरिक मामला है जिसे बहुत जल्द सुलझा लिया जाएगा। 

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