Saturday, Jul 24, 2021
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किसान संसद: टिकैत ने कहा- सांसद हमारी आवाज सदन में उठाएं

  • Updated on 7/22/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान आज सुबह 10 बजे से जंतर-मंतर पर किसान संसद लगाने जा रहे हैं। 200 किसानों को प्रदर्शन करने की अनुमति मिली है। वहीं इस विरोध प्रदर्शन के चलते दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सिंघू बॉर्डर पर विभिन्न धरना स्थलों से किसान जुटेंगे और उसके बाद जंतर मंतर की ओर कूच करेंगे। ऐसे में सिंघू बॉर्डर पर भारी पुलिसबल तैनात किया गया है। 

Live Updates:

- किसान नेता राकेश टिकैत ने सासंदों से उनके मसले उठने की अपील की

जंतर-मंतर पर किसान संसद शुरू

- जंतर-मंतर पहुंचे किसान नेता, कृषि कानून के खिलाफ लगाएंगे 'किसान संसद' 

परविंदर सिंह, DCP बाहरी ज़िला, दिल्ली ने बताया कि किसानों के प्रदर्शन को ध्यान में रखकर टिकरी बॉर्डर पर प्रतिबंध की व्यवस्था की गई। सिर्फ सिंघु बॉर्डर से आने जाने की अनुमति है। टिकरी बॉर्डर से किसानों के प्रदर्शन से संबंधित आवाजाही की अनुमति नहीं है। बाकी अन्य तरह की आवाजाही पर रोक नहीं है। 

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जंतर-मंतर पर कड़ी सुरक्षा
संसद के मानसूत्र के दौरान केन्द्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की प्रदर्शन की योजना के मद्देनजर मध्य दिल्ली में जंतर-मंतर पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। जंतर-मंतर, संसद भवन से कुछ मीटर की दूरी पर ही है।  अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवानों को तैनात किया गया है। पुलिस की सुरक्षा के साथ 200 किसानों का एक समूह बसों में सिंघू बॉर्डर से जंतर-मंतर आएगा और वहां पूर्वाह्न 11 बजे से शाम पांच बजे तक विरोध प्रदर्शन करेगा।     

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संयुक्त किसान मोर्चा से मांगा गया शपथ पत्र
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) को इस बारे में एक शपथपत्र देने के लिए कहा गया है, जिसमें कहा जाए कि कोविड-19 के सभी नियमों का पालन किया जाएगा और आंदोलन शांतिपूर्ण होगा। इस साल 26 जनवरी को एक ट्रैक्टर परेड के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में हुई हिंस के बाद यह पहली बार है, जब अधिकारियों ने विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों को शहर में प्रवेश की अनुमति दी है।     

गौरतलब है कि दिल्ली से लगे टिकरी बॉर्डर, सिंघू बॉर्डर तथा गाजीपुर बॉर्डर पर किसान पिछले साल नवम्बर से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दी जाए। हालांकि सरकार का कहना है कि ये कानून किसान हितैषी हैं। सरकार और प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच कई दौर की वार्ता बेनतीजा रही है।

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