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कृषि संबंधित विधेयकों के खिलाफ पंजाब में किसानों का ‘रेल रोको’ आंदोलन हुआ तेज

  • Updated on 9/26/2020


नई दिल्ली/टीम डिजिटल। संसद से पारित कृषि संबंधित विधेयकों के खिलाफ किसानों का ’’रेल रोको’’ आंदोलन पंजाब में कई स्थानों पर शनिवार को भी जारी रहा। ’’रेल रोको’’ आंदोलन की वजह से राज्य में रेल गाडिय़ों की आवाजाही रुकी हुई है। किसानों ने अपने इस आंदोलन को 29 सितंबर तक के लिए बढ़ा दिया है। इससे पहले यह आंदोलन 24 से 26 सितंबर तक होना था। अमृतसर में किसान अमृतसर-दिल्ली मार्ग की पटरियों पर बैठ गए और विधेयकों के विरोध में अपनी कमीकों उतार दीं। शुक्रवार को राज्य में करीब पूर्ण ’’बंद’’ था। 

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पंजाब के अलावा पड़ोसी हरियाणा में भी प्रदर्शन देखे गए और किसानों ने सड़कों को बाधित किया। इसके अलावा, कई किसान संघों के आह्वान पर ’’ भारत बंद’’ के मद्दनेजर, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल और कर्नाटक में भी प्रदर्शन हुए। पंजाब में ’’रेल रोको’’ आंदोलन की अपील किसान मजदूर संघर्ष समिति ने की है,जिसके बाद रेलवे ने 26 सितंबर तक 20 ट्रेनों को आंशिक रूप से रद्द कर दिया जबकि पांच रेलगाडिय़ों के मार्ग को छोटा कर दिया। 

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रेल की पटरियों पर बैठे किसानों ने शनिवार को भाजपा नीत केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कृषि विधेयकों को वापस लेने की मांग की। किसानों ने इन विधेयकों को काला कानून बताया है। अमृतसर में कुछ प्रदर्शनकारियों ने कृषि विधेयकों के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए अपनी कमीजें उतार दीं। किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवण सिंह पंढेर ने फोन पर कहा,‘‘किसानों ने सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिये विरोधस्वरूप अपने कुर्ते और कमीजें उतार दी हैं।‘‘ किसानों ने भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के तत्वावधान में नौ जिलों में रेल की पटरियों को बाधित किया हुआ है। 

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बीकेयू (एकता उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह केकरी कलां ने कहा कि रेल की पटरियों को मंसा, बरनाला, नाभा (पटियाला), छाजला (संगरूर), रामपुरा (बंठिडा), अजितवाल (मोगा), कोटकापुरा (फरीदकोट), गिदड़बाहा (मुक्तसर), जलालाबाद (फजिलका) में बाधित किया है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनों में बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने हिस्सा लिया है। कलां ने कहा कि किसान अपने प्रदर्शनों के जरिए सरकार को कृषि विधेयक वापस लेने पर मजबूर करेंगे। इन विधेयकों से सिर्फ‘‘बड़े उद्योगतपियों‘’को फायदा होगा।  

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किसानों ने शंका व्यक्त कि है कि केंद्र सरकार के कृषि सुधार न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली को खत्म करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे और किसानों को बड़े उद्योगपतियों के रहम पर छोड़ देंगे। किसानों ने कहा कि वे तीनों विधेयकों के वापस होने तक अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे। संसद ने हाल में कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवद्र्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 तथा आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक को पारित कर दिया है। इन विधेयकों को अभी राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली है। 

 

 

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