Tuesday, Jul 23, 2019

फारूक अब्दुल्ला का राजमार्ग पर सुरक्षाबलों द्वारा लोगों को परेशान करने का आरोप 

  • Updated on 6/26/2019

जम्मू-कश्मीर पर सर्वाधिक समय तक अब्दुल्ला परिवार और उनकी नैशनल कांफ्रैंस का ही शासन रहा। अब्दुल्ला परिवार की तीन पीढिय़ों के सदस्य जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। सबसे पहले शेख अब्दुल्ला, फिर उनके पुत्र फारूक अब्दुल्ला और उसके बाद फारूक अब्दुल्ला के पुत्र उमर अब्दुल्ला प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।

फारूकअब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला दोनों के ही भाजपा व कांग्रेस से संबंध रहे हैं। जहां वाजपेयी सरकार में  उमर अब्दुल्ला विदेश राज्यमंत्री रह चुके हैं वहीं मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार में फारूक अब्दुल्ला ऊर्जा मंत्री रहे। 

फारूक अब्दुल्ला ने पाक अधिकृत कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा करार दिया तथा 15 जनवरी, 2018 को कहा कि ‘‘पाकिस्तान की बर्बादी के लिए भारत ही जिम्मेदार है।’’  

और अब 23 जून को उन्होंने सुरक्षाबलों पर जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर से गुजरने वाले वाहनों को रोक कर उनके चालकों और अन्य लोगों को परेशान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसी गतिविधि को तुरन्त रोका जाना चाहिए। पहलगाम में पत्रकारों से बात करते हुए वह बोले :

‘‘जब मैं श्रीनगर से पहलगाम आ रहा था तब मैंने देखा कि सुरक्षाबल राजमार्ग के कई स्थानों पर वाहनों को रोक रहे हैं...यह अच्छी बात नहीं है। मैंने विश्व में कहीं भी राजमार्गों पर लोगों को रोक कर परेशान किए जाते हुए नहीं देखा और वे राजमार्ग पर सामान्य रूप से यात्रा करते हैं।’’

‘‘उन्हें (सुरक्षाबलों को) राजमार्ग पर लोगों को शांति से यात्रा करने देना चाहिए। अत: सुरक्षाबल तुरन्त लोगों को परेशान करना बंद करें।’’

इस समय जबकि जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान समॢथत आतंकियों द्वारा लगातार ङ्क्षहसा जारी है और वे सुरक्षाबलों के जवानों तथा क्षेत्र की आम जनता को भारी क्षति पहुंचा रहे हैं, फारूक अब्दुल्ला का यह शिकवा उचित नहीं।

 डा. अब्दुल्ला को मालूम ही है कि हाल ही के वर्षों में आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर में राजमार्ग के साथ लगते इलाकों पुलवामा, पम्पोर, आवंतीपुरा, ऊधमपुर, झज्जर कोटली, सांबा व राजबाग थाने और नगरोटा आदि में अनेक हमले करके जानमाल की भारी क्षति पहुंचाई है।

2014 से 15 फरवरी, 2019 तक जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों के 400 जवानों को शहीद किया। यही नहीं जून, 2019 का महीना घाटी में सर्वाधिक खूनी महीनों में से एक रहा है जिसके पहले 18 दिनों में यहां आतंकवाद की 17 घटनाओं में सुरक्षाबलों के 11 सदस्यों को शहीद किया गया है और ङ्क्षहसा का यह दौर अभी भी थमा नहीं है।          

  —विजय कुमार

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