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J&K में 'सेना के रक्षा कवच' के रूप में इस्तेमाल हुए 'फारूक अहमद डार' की चुनाव में लगाई गई ड्यूटी

  • Updated on 4/19/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। फारूक अहमद डार (Farooq Ahmed Dar) वह शख्स जिसे तकरीबन दो साल पहले सेना ने बतौर मानव कवच इस्तेमाल किया था। उसकी ड्यूटी मुख्य चिकित्सा अधिकारी नजीर अहमद (Nazir Ahmad) ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग में बतौर सफाई कर्मचारी मध्य कश्मीर स्थित बडगाम में एक पोलिंग स्टेशन पर लगा दी है। 

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ज्ञात हो तकरीबन दो वर्ष पहले 9 अप्रैल 2017 को श्रीनगर (Srinagar) में जब लोकसभा उपचुनाव हुए थे उस दौरान पत्थरबाजों से बचने के लिए सेना के जवानों ने 'मानव कवच' के रूप में फारूक अहमद डार को इस्तेमाल किया था। फारूक को सेना के जवानों ने जीप पर बांध दिया था, ताकि कोई उन पर पथराव न करे। इस तरह से सेना के जवानों ने फारूक को मानव कवच बनाया था।

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डार की एक तस्वीर 2017 में अखबार के पहले पन्ने पर प्रकाशित भी हुई थी, जिसमें वह सेना की जीप के बोनट पर बंधा हुए था। इसे लेकर तीखी और मिश्रित प्रतिक्रिया आई थी। जांच में बाद में पता चला कि न 9 अप्रैल 2017, बडगाम में वोट डालने के बाद वह अपनी बहन के घर एक शोक सभा में जा रहा था तभी सेना के जवानों ने उसे बांधकर 28 गांवों में पांच घंटे तक घुमाया था।

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सेना के ऐसा करने का मकसद उन सभी प्रदर्शनकारियों को डराना था, जिनकी पेट्रोलिंग कर रही सेना की टुकड़ी से भिड़ंत हो सकती थी। उस दिन बडगाम जिले के उलटिगम मतदान केंद्र पर इतिहास का सबसे कम (7%) मतदान हुआ था। मतदान के शुरुआती 100 मिनट में 2 वोट ही डाले थे। 
 

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