‘उपवास’ से लाई जा सकती है मधुमेह में कमी

  • Updated on 11/17/2018

थोड़े -थोड़े अंतराल के बाद उपवास, यदि वैज्ञानिक तरीके से रखा जाए तो सम्भवत: मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है। कनाडा के शोधकत्र्ताओं के एक समूह ने यह दावा बड़े लम्बे समय से मधुमेह से पीड़ित कम से कम तीन व्यक्तियों को चिकित्सकीय उपवास पर डाल कर एक वर्ष के भीतर ही उनकी इन्सुलिन छुड़वाने में सफलता प्राप्त करने के बाद किया। हालांकि डाक्टरों ने चेतावनी दी कि चूंकि ये परिणाम एक परीक्षण के हैं, इसलिए किसी को भी अभी इसे व्यक्तिगत तौर पर नहीं आजमाना चाहिए।

इसके सीमित परीक्षण किए गए हैं, डाक्टर इसे ‘घर पर न आजमाने’ की सलाह देते हैं क्योंकि भोजन से परहेज करने का परिणाम विपरीत भी हो सकता है।

साधारण रूप में कहें तो चिकित्सकीय उपवास का मतलब है एक विशेष समय के लिए सभी कैलरीयुक्त भोजनों तथा ङ्क्षड्रक्स से नियंत्रित तथा आवश्यक तौर पर अलग रहना। परीक्षण के दौरान रोगियों ने उपवास के दिनों में केवल रात्रि भोजन (डिनर) किया, जबकि गैर-उपवास के दिनों में उन्होंने लंच तथा डिनर दोनों लिए। खाने के समय उन्हें कम कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन करने का सुझाव दिया गया।

रोगियों को उपवास वाले दिनों में असीमित मात्रा में बहुत कम कैलरी वाले तरल पीने की भी इजाजत थी जैसे कि पानी तथा चाय और पर्याप्त माइक्रोन्यूट्रिएंट्स उपलब्ध करवाने के लिए एक सामान्य मल्टीविटामिन सप्लीमैंट को प्रोत्साहित किया गया।

हाल ही में ब्रिटिश मैडीकल जर्नल में छपे कनाडाई शोध के मामले में 40 वर्षीय पहले रोगी, जिसे गत 20 वर्षों से मधुमेह था और 52 वर्षीय दूसरे व्यक्ति, जिसे 25 वर्षों से मधुमेह था ने क्रमश: 7 तथा 11 महीनों के लिए सप्ताह में 3 बार 24 घंटों के लिए उपवास किया। तीसरे 67 वर्षीय व्यक्ति को गत 10 वर्षों से मधुमेह था और उसने एक दिन छोड़ कर 24 घंटों के लिए उपवास किया।

जहां चिकित्सकीय उपवास से पहले सभी तीनों रोगी नियमित रूप से इन्सुलिन का टीका लगवाते थे वहीं परीक्षण के बाद वे इसे छोडऩे में सक्षम हो गए। दूसरे तथा तीसरे रोगी ने सभी तरह की दवाएं पूरी तरह से छोड़ दीं। पहले रोगी ने उपचार परीक्षण के बाद 4 दवाओं में से तीन लेनी बंद कर दीं। पहले रोगी के वजन में 12 प्रतिशत तथा पेट के घेरे में 13 प्रतिशत की कमी आई। दूसरे तथा तीसरे रोगी ने क्रमश: 18 प्रतिशत तथा 10 प्रतिशत वजन घटाया।

ब्रिटिश मैडीकल जर्नल में छपे अध्ययन में शोधकत्र्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि डाक्टरों की देख-रेख तथा चिकित्सकीय उपवास से टाइप-2 मधुमेह को पलटने में मदद तथा दवाओं के न्यूनतम इस्तेमाल और सम्भवत: मधुमेह में सर्जीकल दखलंदाजी से बचने में मदद मिल सकती है। फोॢटस सी.डी.ओ.सी. सैंटर ऑफ एक्सीलैंस फार डायबिटीज मैटाबोलिक डिसीजिस एंड एंडोक्राइनालॉजी के चेयरमैन डा. अनूप मिश्रा ने बताया कि दीर्घकाल में भोजन पर लगे प्रतिबंधों पर अमल करना कठिन हो जाता है।                                                                                                          ---डी. नंदन झा

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी समूह) उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.