Wednesday, Oct 16, 2019
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जुलाई में भारतीयों ने अब तक की सबसे अधिक राशि विदेश भेजी

  • Updated on 9/18/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। एक तरह जहां सरकार प्रत्यक्ष विदेशी निवेशकों (FDI) के साथ-साथ विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को आकृषित करने का प्रयास कर रही है, वहीं भारतीयों ने इस साल जुलाई महीने में उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) के तहत 1.69 अरब डॉलर की सबसे अधिक मासिक रकम बाहर भेजी है। 

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एलआरएस स्कीम के तहत वित्त वर्ष 2019-20 के पहले 4 महीनों में 5.8 अरब डॉलर विदेश भेजा जा चुका है। वहीं मई 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद से अब तक 45 अरब डॉलर (एक डॉलर के मुकाबले 70 रुपए के विनिमय दर से 3.15 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा विदेशों में भेजे जा चुके हैं। मोदी सरकार की तुलना में यूपीए के दूसरे कार्यकाल के दौरान 5 सालों (अप्रैल 2009-मार्च 2014) में विदेश भेजी गई कुल एलआरएस राशि 5.45 अरब डॉलर थी।

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एलआरएस के तहत किसी भारतीय को एक वित्त वर्ष में रोजगार के लिए विदेश जाने, विदेशों में पढ़ाई, इलाज, रिश्तेदारों को पैसे भेजने जैसी सुविधाओं के तहत अढ़ाई लाख डॉलर बाहर भेजने का अधिकार है। आरबीआई के आंकड़े दिखाते हैं कि पिछले पांच साल में एलआरएस के तहत 14 बिलियन डॉलर की रकम केवल यात्रा पर विदेश में खर्च की गई जबकि लगभग 10.5 अरब डॉलर की रकम करीबी रिश्तेदारों की देखभाल करने और 10 अरब डॉलर की रकम पढ़ाई के लिए भेजी गई। बाकी के 4.8 अरब डॉलर की रकम उपहार के रूप में जबकि 1.9 अरब डॉलर की रकम विदेशों में इक्विटी और ऋण में निवेश के लिए खर्च की गई। 

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पिछले 5 सालों में एलआरएस के तहत बाहर जितनी राशि भेजी गई उसने उसी दौरान एफपीआई के तहत देश में आने वाली रकम को शून्य कर दिया। जहां अप्रैल 2014 से अब तक एफपीआई ने 1,76,212 करोड़ रुपए की कुल राशि भारतीय इक्विटीज में निवेश की, वहीं उन्होंने उसी दौरान ऋण बाजार में 2,60,017 करोड़ की राशि निवेश की।  

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