Thursday, May 19, 2022
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'खतना' प्रथा महिलाओं की निजता के अधिकार का उल्लंघन- सुप्रीम कोर्ट

  • Updated on 7/30/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में प्रचलित नाबालिग लड़कियों का खतना करने की प्रथा को सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की निजता के अधिकार का उल्लंघन करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि महिलाओं का खतना केवल इसलिए नहीं किया जा सकता कि उन्हें शादी करनी है या अपने पति को खुश करना है। इसके अलावा महिलाओं का और भी दायित्व है।

सुप्रीम कोर्ट ने खतना प्रथा को भारत में पूरी तरह से बैंन करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि यह लैंगिक संवेदनशीलता का मामला है और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। यह किसी भी व्यक्ति के पहचान का केंद्र बिंदु होता है और यह कृत्य उसके पहचान के खिलाफ है।

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कोर्ट ने कहा कि इस  तरह का कृत्य एक औरत को आदमी के लिए तैयार करने के मकसद से किया जाता है जैसे कि वह जानवर हो। कोर्ट ने सवाल पूछते हुए कहा कि किसी महिला पर यह दायित्व क्यों हो कि वह अपने पति को खुश करे। कोर्ट ने दाऊदी समाज में वर्षों से चली आ रही इस प्रथा का विरोध करते हुए कहा कि किसी प्रथा के नाम पर आपराधिक कृत्य करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

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किसी के प्राइवेट पार्ट को छूना पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध है। कोर्ट ने आगे कहा कि खतना पूरी तरह से जुर्म है और कोर्ट इस पर रोक का समर्थन करता है। सरकार पहले ही इसको लेकर साल साल की कैद की सजा का ऐलान कर चुकी है।विदित हो कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में एक याचिका पर सुनवाई कर रही है।

कोर्ट ने तेलंगाना और केरल सरकार को इस विषय को लेकर नोटिस भी जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट में वकील सुनीता तिहाड़ ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई के लिए याचिका दी थी, जिसपर कोर्ट सुनवाई कर रहा है।

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