Sunday, Dec 04, 2022
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नारीवाद पाश्चात्य की अवधारणा नहीं : प्रो. शांतिश्री

  • Updated on 5/24/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। नारीवाद कोई पाश्चात्य की अवधारणा नहीं है। नारीवाद की जड़ें भारतीय सभ्यता में बहुत गहरी हैं। हमारे देश में द्रौपदी जैसी महान नारी हुई हैं। सबसे पहली सिंगल मदर सीता भी भारत में ही हुई हैं। यह बात मंगलवार को जेएनयू कुलपति शांतिश्री धुुलिपुडि़ पंडित ने सुषमा स्वराज स्त्री शक्ति सम्मान 2022 ग्रहण करते समय कहीं।

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देश के हर भाग में हुईं महान नारियां
उन्होंने कहा कि मैं दक्षिण भारत से आती हूं जहां कण्णगी और मन्नीमेगलई जैसी महान नारियां हुईं हैं। मैं ऐसे लोगों से आग्रह करती हूं जो आधुनिक भारत के नैरेटिव में रुचि रखते हैं। कि देश की स्त्री कथाओं के बारे में पढ़ें, देश के हर कोने में महान स्त्रियां हुई हैं। उन्होंने पूर्व नेता सुषमा स्वराज को याद करते हुए कहा कि वह एक महान नेता थीं।

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सुषमा स्वराज को बताया मंत्रमुग्ध करने वाली वक्ता
वो हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं की एक मंत्रमुग्ध करने वाली वक्ता थीं। उनके द्वारा किए गए मानव सशक्तिकरण के काम के लिए देश आज भी उन्हें याद करता है। सुषमा स्वराज स्त्री शक्ति सम्मान 2022 समारोह रीथिंक इंडिया द्वारा आयोजित किया गया था। 
 

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