Thursday, Jan 23, 2020
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BHU में क्यों मचा है बवाल, जानें- कौन हैं फिरोज खान

  • Updated on 11/22/2019

नई दिल्ली/ प्रियंका शर्मा। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (Banaras Hindu University) में कुछ दिनों से एक संस्कृत प्रोफेसर की नियुक्ति को लेकर विवाद छिड़ गया है। दरअसल बीएचयू (BHU) में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में संस्कृत पढ़ाने के लिए डॉ. फिरोज खान (Dr. Feroze Khan) की नियुक्ति की गई है जिसका विरोध वहां के छात्र कर रहे हैं। डॉ. फिरोज खान का विरोध इसलिए हो रहा है कि एक मुसलमान कैसे संस्कृत पढ़ा सकता है। 

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हड़ताल वापस लेने का फैसला
हालांकि अब बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विभाग संकाय में प्रोफेसर डॉ फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर विवाद और विरोध के बाद छात्रों ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर राकेश भटनागर से मुलाकात के बाद हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है। छात्रों का कहना है कि वीसी ने उन्हें दस दिनों में इससे निपटने का भरोसा दिया है। इसके साथ ही छात्र आज यानी शुक्रवार से अपनी क्लास ले रहे हैं। 

विवाद और प्रदर्शन के बीच यूनिवर्सिटी में चल रहें इस बवाल पर कुछ अन्य विभाग के छात्रो ने प्रोफेसर फिरोज खान के समर्थन में पोस्टर पर 'वी आर विथ यू फिरोज खान' और 'संस्कृत किसी की जागीर नहीं' लिखकर मार्च निकाला था 

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फिरोज खान के लिए आसान नहीं था संस्कृत का सफर
डॉ. फिरोज खान जयपुर जिले के बगरु के निवासी हैं। जिस तरह से आज उनके संस्कृत पढ़ाने को लेकर विरोध हो रहा है वहीं करीब 25 साल पहले उनके संस्कृत पढ़ने को लेकर भी विरोध हुआ था। उनके पिता रमजान खान ने जब उनका दाखिला बगरु के राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत स्कूल में करवाया तो मुस्लिम समाज और रिश्तेदारों ने उनका बहुत विरोध किया। उन लोगों का कहना था कि घर के पास बने मदरसे में फिरोज पढ़ाई करें। लेकिन रमजान खान ने तय कर लिया था कि बेटे को संस्कृत का विद्वान बनाना है।

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मुस्लिम समाज और रिश्तेदारों ने तोड़ा नाता
उस समय फरोजखान के पिता रमजान खान से मुस्लिम समाज और रिश्तेदारों ने ये कहते हुए नाता तोड़ लिया था कि अगर वे अपने बेटे को संस्कृत पढ़ा रहे हैं तो बिरादरी उनसे रिश्ता नहीं रखेगी। करीब दस सालों तक रिश्तेदारों ने उनसे कोई संबंध नहीं रखा। लेकिन रमजान खान ने समाज की परवाह न करते हुए अपने चारों बेटों को संस्कृत की पढ़ाई करवाई।

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परिवार में पीढ़ियों से होती है गौसेवा
जयपुर जिले के बदरु में दो कमरे और एक छोटे बरामदे में फिरोज खान का पालन- पोषण हुआ। इनके परिवार में पिढ़ियों से गौसेवा की जाती रही है। फिरोज खान के दादा गौसेवा करते थे और बाद में अब पिता रमजान खान ने कृष्ण और राम के भजन को ही अपना पेशा बनाया। जिसके कारण इनके सभी बच्चों को भजन और हनुमान चालीसा आता है।

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सीएम गहलोत ने किया था सम्मानित
डॉ. फिरोज खान ने मेहनत से संस्कृत में शिक्षा शास्त्रि तक की शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद वे जयपुर के संस्कृत कॉलेज में पढ़ाने लगे, और बाद में संस्कृत वि.वि. में गेस्ट फेकल्टी के रूप में जाने लगे। इसी साल संस्कृत दिवस पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उन्हें संस्कृत दिवस पर सम्मानित किया था। वहीं उन्हें शिक्षा विभाग की तरफ से बेस्ट टीचर का अवार्ड भी दिया गया है।

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सभी धर्मों का करते हैं सम्मान
फिरोज खान के पिता रमजान खान ने अपने बच्चों में अपनी बड़ी बेटी का नाम लक्ष्मी रखा है वहीं छोटी बेटी का नाम अनिता है। उन्होंने अपनी बेटी की शादी के कार्ड पर गणेश जी की फोटो छपवाई। चारों बेटों को संस्कृत की शिक्षा दिलवाई और उनके बच्चे मंदिर भी जाते और फिर मस्जिद जातो है। रमजान खान का कहना है कि हमारे लिए सभी धर्म समान है।

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