Wednesday, Jan 29, 2020
fifth day of hearing in supreme court ayodhya vivad ramlala virajman

अयोध्या विवाद : SC में सुनवाई का पांचवां दिन, हिंदू पक्ष की ओर से रखी गई ये दलीलें

  • Updated on 8/13/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। तीन दिन की छुट्टी के बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अयोध्या जमीन विवाद (Ayodhya) मामले में सुनवाई चल रही है। आज सुनवाई का पांचवा दिन है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत इस मामले में अब हफ्ते में 5 दिन सुनवाई कर रही है। शुक्रवार को कोर्ट के इस फैसले का सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विरोध किया था। हालांकि इस विरोध को अभी तक कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया है। कोर्ट में राम लला विराजमान के वकील ने मंगलवार को एक बार अपनी दलीलें पेश की। 

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अयोध्या में विवादित 2.77 एकड़ की जमीन पर के. परासरण की दलीलें खत्म होने के बाद रामलला के लिए वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन दलील पेश कर रहे हैं।

राम लला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि ये ऐतिहासिक बात है, जिसमें लोग बाहर से भारत आए और उन्होंने मंदिरों को तोड़ा। वहीं इतिहास के कुछ पन्नों की रिपोर्ट में ये भी जिक्र किया गया है कि ब्रिटिश शासन में हिंदुओं को बाहर रखने के लिए एक दीवार बनाई गई थी। साथ ही उन्होंने बताया कि किसी भी रिपोर्ट में ये नहीं बताया गया है कि वहां नमाज की जाती थी। लेकिन अब भी हमें इसकी कोई जानकारी नहीं है। मुसलमानों के नमाज करने का वहां सन् 1528 से 1855 तक कोई सबूत नहीं है। हाईकोर्ट ने खुद इस मामले का जिक्र किया है।

आज सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आप एक नजरिए से इस दुनिया को देख रहे लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि हर कोई इसे आपके नजरिए से ही देख रहा हो। एक नजरिया ये भी है कि जिस स्थान पर हम पूजा कर रहे वो खुद में एक ईश्वर है लेकिन दूसरे नजरिए से देखे तो हमें उस जगह पर पूजा करने का हक मिलना चाहिए। हमें इस मामले को  दोनों ही नजरिए से देखना होगा। 

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जस्टिस की इस बात को सुनकर राम लला की तरफ से केस लड़ रहे वकील वैद्यनाथन ने कहा कि ये नजरिया हमारा है अगर इस पर कोई और अपना हक दिखाता है तो हम उससे अच्छे से डील कर लेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने राम लला विराजमान के वकील से अयोध्या में विवादित 2.77 एकड़ भूमि पर कब्जे के सबूत पेश करने को कहा है। पीठ ने कहा कि अगर आप सुन्नी वक्फ बोर्ड के कब्जे वाले दावे को गलत बता रहे हैं तो आप अपना दावा कैसे साबित करेंगे। 

इसके बाद राम लला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जजों ने अपने फैसले में कहा था कि विवादित स्थल पर मंदिर बना था। वैद्यनाथन ने आगे बताया कि हाईकोर्ट के जज एस यू खान ने अपने फैसले में कहा था कि मंदिर के अवशेषों पर मस्जिम बनाया गया।

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सुप्रीम कोर्ट में चल रही बहस के बीच में जस्टिस ने पूछा कि रामलला का जन्म कहा हुआ? इस पर रामलला की तरफ से केस लड़ रहे वैद्यनाथन ने कहा कि पिछली कोर्ट यानी कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाबरी मस्जिद के गुंबद के नीचे वाले स्थान को ही रामलला का जन्म स्थल माना है। उन्होंने आगे कहा कि मुस्लिम पक्ष कभी भी उस जगह पर अपना हक साबित नहीं कर पाया है। जब भी हम हिन्दुओं ने पूजा करने की बात कही तो मुस्लिम पक्ष ने लड़ाई शुरू कर दी।

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वहीं वैद्यनाथन ने कहा कि 72 साल के मोहम्मद हाशिम ने कोर्ट में गवाही देते हुए कहा कि हिन्दुओं के लिए अयोध्या उतना ही महत्व रखता है जितना हम मुस्लमानों के लिए मक्का मदीना। वहीं आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने ही अपने फैसले में कहा था कि मंदिर के लिए मूर्ति होना जरूरी नहीं है। वहीं वैद्यनाथन ने आगे कहा कि कभी भी मुस्लिम पक्ष रामलला जमीन पर उसका कब्जा है या ये जमीन उसकी है इस दलील को साबित नहीं कर पाया है। इसलिए उस स्थान पर देवता का हक है और वहां पर उनकी आस्था को ही मानना चाहिए।

बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की सुनवाई कर रहे हैं।

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संविधान पीठ अयोध्या में विवादित 2.77 एकड़ भूमि तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला- के बीच बराबर बराबर बांटने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर छह अगस्त से नियमित सुनवाई कर रही है।

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