Friday, May 14, 2021
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पहली बार सूरज के सबसे नजदीक जाने वाला सोलर प्रोब यान रवाना, रफ्तार 190 किमी/सेकंड

  • Updated on 8/12/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इतिहास में पहली बार अनोख कारनामा कर दिखाया है। नासा ने ऐसा अंतरिक्ष यान बनाया है जो सूरज के बेहद करीब पहुंचेगा। सूरज को छूने के पहले मिशन के तहत नासा ने पार्कर सोलर प्रोब को रविवार को रवाना किया। सूर्य के बाहरी वातावरण के रहस्यों पर से पर्दा उठाने और अंतरिक्ष के मौसम पर पड़ने वाले उसके प्रभावों को जानने के लिए यह मिशन सात साल का सफर करेगा। अमेरिका के केप केनेवरल एअर फोर्स स्टेशन पर स्पेस लॉन्च कॉम्प्लेक्स 37 से यह यान प्रक्षेपित किया गया।

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नासा ने सूर्य के पास जाने वाला पार्कर यान लॉन्च किया। यान की रफ्तार 190 किमी प्रति सेकंड है। वह 85 दिन बाद यानि 5 नवंबर को सूर्य की कक्षा में पहुंचेगा। सूर्य की पृथ्वी से दूरी करीब 15 करोड़ किलोमीटर है। यान को सूर्य से 61 लाख किमी का फासले पर स्थापित किया जाएगा। यान को कार्बन फाइबर प्लेट्स से बनाया गया है ताकि वह 1371 डिग्री सेल्सियस का तापमान सह सके।

अंतरिक्षयान को ले जाने वाले यूनाइटेड लॉन्च अलायंस डेल्टा 4 हेवी रॉकेट का प्रक्षेपण कल प्रक्षेपण सीमा के उल्लंघन के कारण टाल दिया गया था। कार के आकार का अंतरिक्ष यान सीधे सूरज के वातावरण के भीतर से गुजरेगा जो उसकी सतह से करीब 40 लाख मील दूर है और इससे पहले भेजे गए अंतरिक्ष यानों से सात गुना से ज्यादा सूर्य के करीब जाएगा। इसमें लगे थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम के कारण ऐसा संभव हो पाएगा।

इस मिशन पर 1.5 अरब डॉलर का खर्च आएगा। सूर्य के बाह्य वातावरण कोरोना से गुजरने के दौरान यह इस तारे का सबसे नजदीक से अवलोकन करेगा। पार्कर सोलर प्रोब अपने साथ कई उपकरण लेकर गया है जो सूरज का दूर से, आस-पास और सीधे तौर पर अध्ययन करेगा। इन अध्ययनों से मिले डेटा, हमारे तारे के बारे में तीन मौलिक सवालों का जवाब ढूंढने में वैज्ञानिकों की मदद करेंगे।

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पार्कर सोलर प्रोब जैसा सूर्य के अध्ययन का मिशन दशकों से वैज्ञानिकों का स्वप्न रहा है। हालांकि, हीट शील्ड, सोलर ऐरे कूलिंग सिस्टम और फॉल्ट मैनेजमेंट सिस्टम जैसी जरूरी प्रौद्योगिकी हाल के वर्षों में ही हासिल की जा सकी है, जिससे इस तरह के मिशन को साकार किया जा सकेगा। पार्कर सोलर प्रोब सूर्य के बाहरी भाग कोरोना का अध्ययन करेगा। सूर्य की गतिविधियों और प्रक्रियाओं के बारे में वैज्ञानिकों के कई सवालों का जवाब कोरोना के पास है।

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