Wednesday, Oct 20, 2021
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800 साल बाद पहली बार सौर-मंडल के दो ग्रह बृहस्पति-शनि एक-दूसरे के इतने करीब से गुजरे

  • Updated on 12/22/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। करीब 800 साल बाद अंतरिक्ष में बृहस्पति-शनि ग्रह एक-दूसरे के काफी करीब देखे गये थे। यह अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए ऐतिहासिक दिन था। यह अनोखा नजारा कल रात को देखा गया था। 

बीती रात बृहस्पति और शनि की इस समय में सबसे बड़ा ग्रह चमकदार तारे की तरह सौरमंडल में दिखाई दिया, जबकि शनि उसके सामने कुछ फीका और छोटा दिखाई दिया। दोनों ग्रह जब कुछ देर के लिए अपनी-अपनी कक्षाओं में एक-दूसरे के सामने आए तो वे एक चमकदार तारे की तरह नजर आए।

यह नजारा अपने आप में काफी दुर्लभ था क्योंकि यह जीवनकाल में एक ही बार आता है। इसीलिए इसे काफी महान संयोग (The Great Conjunction) कहा जा रहा है। यह संयोग 400 साल बाद पड़ा, गुजर रहे ग्रहों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग कोलकाता और पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में एकत्र हुए थे।

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युति संयोग
बताते चले कि इस तरह की दो खगोलीय पिंड पृथ्वी से देखने पर एक-दूसरे के बेहद पास नजर आते हैं तो इसे युति कहते हैं। वहीं, ग्रहों के एक सीध में आने को क्रिसमस स्टार कहते हैं। इस बारे में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बताया है कि यह नजारा शाम के समय दोनों ग्रहों के पास आने को पर देखा जा सकेगा। इतना ही नहीं, यह अनोखा नजारा अगले दो सप्ताह तक देखा जा सकता है।

बताया जा रहा है कि यह दोनों ग्रह, बृहस्पति और शनि आज रात इतने करीब होंगे कि ये एक ही दिखेंगे। अनुमान है कि इन दोनों के बीच सिर्फ 0.1 डिग्री की दूरी होगी। गौर करने वाली बात यह है कि 800 सौ साल पहले यह मौका आया था और एक बार फिर इसे देखा जा सकेगा।

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क्यों होता है ऐसा
वैज्ञानिकों की माने तो ऐसा अनोखा नजारा इसलिए देखने को मिलता है क्योंकि सूर्य 21 दिसंबर को कर्क रेखा से मकर रेखा की तरफ उत्तरायण से दक्षिणायन की ओर प्रवेश करेगा। दक्षिणायन में प्रवेश के साथ ही सूर्य की किरणें बहुत कम समय के लिए पृथ्वी पर रहती हैं। इस बीच सूर्य की मौजूदगी करीब 8 घंटे रहती और इसके अस्त होने के बाद लगभग 16 घंटे की रात रहती है।

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क्या कहते हैं खगोल विज्ञानिक
खगोलविदों का कहना है कि युति इसलिए विशेष है क्योंकि इस बार दोनों ग्रह एक-दूसरे से बेहद करीब थे। उन्होंने कहा, बृहस्पति और शनि के बीच एक डिग्री के महज 10वें हिस्से जितनी दूरी होगी या फिर हम कह सकते हैं कि दोनों ग्रहों के बीच की दूरी चंद्रमा के पांचवें हिस्से के बराबर होगी।

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