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वन मंत्री हरक सिंह ने अपनी सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

  • Updated on 5/15/2019

देहरादून/ब्यूरो। फॉयर सीजन में वन विभाग के मुखिया समेत चार बड़े अफसरों को विदेश दौरे की अनुमति देने के मामले में वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत (Harak Singh Rawat) ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि विभागीय मंत्री होने के नाते इस सम्बंध में उनकी संस्तुति नहीं ली गई, जो रूल ऑफ बिजनेस के खिलाफ है।

हरक सिंह ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत (trivendra singh rawat) और प्रमुख सचिव कार्मिक को पत्र भेजकर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से यहां तक पूछा है कि यदि सरकार में उनकी कोई उपयोगिता नहीं है। ऐसे ही काम चलना है, तो वह मंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। हरक सिंह के कड़े रुख से सरकार में हलचल मच गई है।

उत्तराखण्ड (uttarakhand) के पहाड़ी क्षेत्र में इन दिनों चारों ओर जंगल धधक रहे हैं। वन महकमा आग पर काबू पाने में अब तक विफल रहा। इसी बीच वन विभाग के मुखिया प्रमुख वन संरक्षक जयराज, कुमाऊं के मुख्य वन संरक्षक डा. विवेक पाण्डेय, वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त हल्द्वानी डा. मधुकर धकाते और डीएफओ तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी नीतिश मणि त्रिपाठी 13 से 26 मई तक चलने वाले लन्दन और पोलैण्ड के दौरे पर निकल चुके हैं।

कहा जा रहा है कि इन अफसरों को राजकीय कार्य से इन देशों का दौरा करना है। सरकार ने फॉयर सीजन में वन अफसरों को विदेश दौरे पर जाने की अनुमति कैसे दे दी? इसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। वन मंत्री ने वनाग्नि को लेकर बनी आपातकालीन स्थिति में वन अफसरों को विदेश जाने की अनुमति देने की जिम्मेदारी पूरी तरह से शासन और मुख्यमंत्री पर डाल दी है। उनका कहना है कि इसके लिए उनसे संस्तुति नहीं ली गई।

वनमंत्री ने प्रमुख सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी (अब अपर मुख्य सचिव) को भेजे पत्र में कहा है कि कार्मिक विभाग वन महकमे की फाइलों को बाईपास करके सीधे मुख्यमंत्री के पास भेज रहा है। यह शासकीय नियमों का सीधा उल्लंघन है।

‘यदि युद्ध लड़ा जा रहा हो और सिपाही मैदान छोड़कर कहीं और चला जाए तो क्या होगा ? फॉयर सीजन में वन विभाग के मुखिया को विदेश जाने की अनुमति कैसे दे दी गई और वो भी विभागीय मंत्री की संस्तुति के बगैर। मैंने मुख्यमंत्री से पूछा है कि क्या मैं सरकार से इस्तीफा दे दूं।’

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