Thursday, Aug 18, 2022
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formation of mithila academy is our main demand: mihir jha

मिथिला अकादमी का गठन हमारी प्रमुख मांग : मिहिर झा

  • Updated on 7/3/2022

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। दिल्ली के प्रत्येक जिले में मिथिलांचल के लोग रहते हैं, अगर बात उनकी जनसंख्या की करें तो करीब 10 लाख लोग मिथिलांचल से हैं। जो दिल्ली के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। चाहे राजनीति हो, शिक्षा हो, व्यापार हो या कोई भी क्षेत्र मिथिलांचल के लोग हर जगह अपना दबदबा मनवा चुके हैं लेकिन इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद अभी तक हमारी कोई अलग अकादमी नहीं है। हमें भोजपूरी अकादमी के साथ जोड़ दिया गया है। मिथिला के लोगों की लंबे समय से मांग है कि एक अलग मिथिलांचल अकादमी बनाई जाए। उक्त बातें मिथिला राज्य संघर्ष समिति के प्रवक्ता मिहिर झा ने नवोदय टाइम्स से बातचीत के दौरान कहीं।
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दिल्ली में मिले मिथिलांचल के लोगों को उचित सम्मान : झा
मिहिर झा ने कहा कि मिथिलांचल के लोगों को जो उचित स्थान व सम्मान दिल्ली में मिलना चाहिए था, वो अभी तक नहीं मिल पाया है और इसी सम्मान के लिए हम संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम लगातार कोशिश कर रहे हैं कि मिथिलांचल के विभिन्न संगठनों को एक बैनर के तले लाने की जोकि अलग-अलग इलाकों में छोटी-छोटी संस्थाओं के रूप में काम कर रहे हैं। यदि सब संगठित होंगे तो केंद्र व राज्य सरकार से अपनी बातें मनवा सकते हैं। हमारे बीच से कई राजनीतिक व्यक्तित्व उभरे हैं लेकिन बात जब चुनावों की आती है तो वो मिथिलांचल की बात कर वोट मांगने आते हैं और हर बार मिथिला अकादमी बनाए जाने का विश्वास दिलवाते हैं पर चुनाव बाद उसे भूल जाते हैं। जिसका हम पुरजोर तरीके से विरोध करते हैं। मिथिलांचल के लोगों का दबदबा दिल्ली में बुराड़ी, किराड़ी, नजफगढ़, पालम, नरेला, बवाना व उत्तम नगर के क्षेत्र में काफी है। 
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मिथिलांचल के लोगों को विंदेश्वरी पाठक देते रहे हैं सहयोग
झा ने कहा कि सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक विंदेश्वरी पाठक मिथिलांचल की शान हैं, जिन्होंने सही मायने में हमेशा से ही मिथिला प्रदेश के लोगों का सहयोग किया है। उन्होंने मिथिला प्रदेश से आने वालों को रोजगार के अवसर दिए हैं और आज भी दे रहे हैं।

विद्यापती स्मृति पर्व का आयोजन हमारी शक्ति
मिहिर झा ने कहा कि बीते तीन दशकों से दिल्ली के 20 जगहों पर हर साल विद्यापती स्मृति पर्व का आयोजन बड़े ही धूमधाम से किया जा रहा है। विद्यापती के गीत-संगीत सहित मिथिलांचल के खान-पान व पहनावे और संस्कृति की झलक देखने को मिलती है।

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