from-the-ranch-to-the-track-of-the-race-this-is-the-story-of-hema-das

खेतों के मेड़ से रेस के ट्रैक तक, कुछ ऐसी है 'गोल्डन गर्ल' की कहानी

  • Updated on 7/22/2019

नई दिल्ली/वरूण कुमार गुप्ता। गोल्डन गर्ल हिमा दास (Hima Das) ने विदेशों में भारत के लिएवो कारनमा कर दिया है जो किसी भी भारतीय एथेलेटिक्स के खिलाड़ी का सपना हो सकता है। 20 दिनो के अंदर में गिमा ने 5 गोल्ड मेडल (Gold Medal) जीतकर देश (India) के खेल इतिहास में एक नया अध्याय रच दिया है। क्या सच में हिमा ने कोई कमाल किया है ऐसा सोचने वाले भी बहुत है जिन्हें ऐसा लगता भी होगा। पर ऐसा कारनामा एक दिन की मेहनत से थोड़े ही होता है। इसके लिए तो सालों की मेहनत लगती है। आज हम आपको हिमा से जुड़ी कुछ ऐसी बाते बताएंगे जो आप भी नहीं जानते होंगे। 

कौन हैं हिमा दास?

हिमा दास असम (Assam) के नगांव जिले के धिंग गांव की रहने वाली हैं। वह अभी सिर्फ 18 साल की हैं। हिमा एक साधारण किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता धान की खेती करते हैं। वह परिवार के 6 बच्चों में सबसे छोटी हैं। हिमा का परिवार 60 बीघा ज़मीन पर खेती करता है, साल भर फसलें उगाता है और तालाब में मछलियां पालता है। हिमा पहले लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थीं और एक स्ट्राइकर के तौर पर अपनी पहचान बनाना चाहती थीं। उन्‍होंने 2 साल पहले ही रेसिंग ट्रैक पर कदम रखा था। उनके पास पैसों की कमी थी, लेकिन फिर भी कोच ने उन्हें ट्रेन कर मुकाम हासिल करने में मदद की। हिमा के कोच निपोन दास (Nipon Das) का कहना है, 'एथलीट बनने के लिए हिमा को अपना परिवार छोड़कर लगभग 140 किलोमीटर दूर आकर रहना पड़ा था।

Image result for Young Hima Das

हिमा के बचपन की एक घटना 

हिमा ने एक बार एक गाड़ी चालक ने हिमा के स्कूल से घर ले जाने के आग्रह से इनकार कर दिया था और उसने उस चालक को चुनौती दी और उसे हराकर घर पहुंची। उनका स्कूल यहां से दो किलोमीटर दूर है। हिमा खेतों में चराई से पहले अभ्यास करती है जो उनके घर से 50 मीटर की दूरी पर है। इसके बाद गांव के लोग वहां अपने मवेशियों को चराने ले जाते हैं। नौ साल की उम्र में हिमा ने एथलेटिक्स को चुना था। उसने अपने पिता के साथ प्रशिक्षण की शुरुआत की थी। एक दिन ढींग नवोदय विद्यालय के खेल अध्यापक सामसुल हक की नजर हिमा पर एक स्कूल प्रतियोगिता के दौरान पड़ी। कोच के मार्गदर्शन में 17 माह का प्रशिक्षण लिया और इसके बाद सब इतिहास बन गया।

गोल्डन गर्ल हिमा दास को दिग्गज हस्तियों ने दी बधाई, पीएम मोदी भी हुए कायल

जब हिमा गई पुलिस स्टेशन

हिमा के पिता रंजीत दास (Ranjit Das) का कहना है कि 2007 में अचानक उन्हें घर के बाहर शोर शराबा सुनाई दिया। जब वे बाहर निकले तो घर के सामने एक लड़का अपना दायां हाथ पकड़े कराह रहा था और बगल में खड़ी हिमा उसे समझाने की कोशिश कर रही थी। सात साल की हिमा दास और उस लड़के के बीच पकड़म-पकड़ाई का खेल चल रहा था, जिसमें लड़के को चोट लग गई थी। हिमा के पिता रंजीत दास के पहुंचने के पहले उनके बड़े भाई लड़के के परिवार को कुछ पैसा देकर मामला सुलझाने की कोशिश भी कर चुके थे। हालांकि लड़के के परिवार ने गांव की पुलिस चौकी में शिकायत कर दी और एक सिपाही हिमा दास का हाथ पकड़ उसे थाने ले गया। दारोगा ने जब लड़की की उम्र देखी और मामले को समझा तो तुरंत सिपाही को उसे घर वापस भेजने का निर्देश दिया। 

Image result for Young Hima Das

हिमा ने बंद कराई अवैध शराब की दुकान

हिमा का हुनर केवल एक एथलीट (Athelete) के रूप में ही नहीं बल्कि एक नेतृत्वकर्ता के रूप में भी उभर कर आया। जब उसने ओनी-एती में एक अवैध शराब की दुकान को खत्म करने के लिए महिलाओं के एक समूह का नेतृत्व किया। इस घटना ने उसके नेतृत्व कौशल को सबके सामने लाकर रखा।

हिमा का शुरूआती सफर

हिमा दास ने धींग पब्लिक हाई स्कूल से पढाई की है और शुरू में फुटबॉल खेलने में उनकी दिलचस्पी थी। वो स्कूल में लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थी और हमेशा से ही फुटबॉल में अपना करियर बनाना चाहती थी। हालांकि उसे भारत में महिला फुटबॉल में अपने लिए कोई संभावना नहीं नजर आई। बाद में एक स्कूल शिक्षक शमशुल होके की सलाह पर उसने एथलीट बनने का फैसला किया और फिर उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

Pro Kabaddi: जयपुर पिंक पैंथर्स से होगा आज यू मुंबा का सामना

हिमा के हुनर को सबसे पहले 2014 में एक इंटर स्कूल दौड़ प्रतियोगिता के दौरान नवोदय स्कूल के ट्रेनर शम्स-उल-हक ने पहचाना। शम्स ने उन्हें ट्रेनर गौरीशंकर रॉय से मिलवाया जिन्होंने बाद में हिमा को खेल और युवा कल्याण निदेशालय के कोच निपोन दास और नबोजीत कौर से मिलवाया। हिमा पर इन दोनों का इतना भरोसा था कि 2017 में नैरोबी में हुई यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए उन्होंने कर्ज तक ले लिया। ताकि हिमा वहां दौड़ने जा सके।

Image result for Young Hima Das

असम से है खास लगाव

हिमा दास केवल अपने खेल को लेकर ही जुनूनी नहीं हैं बल्कि असम में हो रहे अपराध और अन्य समस्याओं के लिए भी उतनी ही बेचैन रहती हैं. 2013 में उन्होंने एक एक्टिविस्ट ग्रुप बनाया जिसका नाम है ‘मोन जई’ (मेरी चाहत) है। असम में रेल के टॉयलेट में हुई हत्याएं हो, बाढ़ पीड़ितों की बदतर हालत या शराब की अवैध दुकानों के खिलाफ मुहिम चलानी हो, हिमा हमेशा आगे रहती हैं। टेम्पेरे में भारतीय तिरंगे के साथ असमिया गमोचा (गमछा) लहराना उनका असम से लगाव दिखाता है।

PKL-2019: आज हरियाणा स्टीलर्स से मुकाबला करेगी पुणेरी पल्टन

हिमा ने दान की अपनी आधी सैलरी

भारत की स्टार महिला धावक हिमा दास ने गृह राज्य असम में राहत प्रयासों में मदद करने के लिए अपने मासिक वेतन का आधा हिस्सा दान कर दिया है। असम में बाढ़ के चलते करीब 52 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। स्टार स्प्रिंटर ने असम को बचाने के लिए लोगों से मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान देने की अपील की है। हिमा ने जो धनराशि दान की है, वह उन्हें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से मिलने वाले वेतन का आधा हिस्सा है। हिमा वहां एचआर विभाग में अधिकारी के पद पर तैनात हैं।
हिमा ने बड़े कॉरपोरेट घरानों और लोगों से अपील की है कि वे भी दान दें और उनके प्रदेश को बचाएं। हिमा ने ट्वीट किया, “हमारे प्रदेश असम में बाढ़ से स्थिति काफी खराब है। 33 में से 30 जिले इससे प्रभावित हैं। इसलिए मैं बड़े कॉरपोरेट घरानों और लोगों से यह अपील करना चाहती हूं कि वह हमारे राज्य की इस मुश्किल स्थिति में मदद करें।”

Image result for Young Hima Das

हिमा की उपलब्धियां

अप्रैल 2018 में हिमा दास ने गोल्ड कोस्ट, ऑस्ट्रेलिया में 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में 400 मीटर और 4 × 400 मीटर रिले में भाग लिया। 400 मीटर की रेस में हिमा दास फाइनल में पहुंची और उन्होंने 51.32 सेकंड का समय लेते हुए छठा स्थान हासिल किया। हालांकि वह गोल्ड मेडल जीतने से महज 1.17 सेकंड पीछे रह गई। 12 जुलाई 2018 को हिमा दास फिनलैंड में आयोजित विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप 2018 में 400 मीटर का फाइनल जीता और 51.46 सेकंड का समय लेते हुए गोल्ड जीता और एक अंतर्राष्ट्रीय ट्रैक इवेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाली वह पहली भारतीय धावक बन बन गई। 25 सितंबर 2018 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा हिमा दास को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित लिया।

पठान ब्रदर्स के बाद टीम इंडिया को फिर मिली इन दो भाइयों की जोड़ी

बन सकती है फिल्म
दरअसल एक्टर-प्रोड्यूसर अक्षय कुमार एथलेटिक्स में भारत की नई सनसनी हिमा दास की जिंदगी पर फिल्म बनाना चाहते हैं। मुंबई में अक्षय ने एक कार्यक्रम ये बात बोली थी। एशियाई खेलों में हिस्सा लेने जा रहे भारतीय दल के समर्थन में आयोजित एक कार्यक्रम में जब अक्षय कुमार से पूछा गया कि बतौर प्रोड्यूसर वे किस भारतीय खिलाड़ी के जीवन पर फिल्म बनाना चााहेंगे तब उनका जवाब था, ‘मैं हिमा दास पर फिल्म बनाना चाहूंगा। 

तो अब आपको पता चल ही गया होगा की किस तरह हीरे को तराशा जाता है। आज की जो हिमा दास है वो कइ सालों पहले एक आम लड़ी थी पर आम होने पर भी उसमें कभी हार न मानने वाला जज्बा था जिसे उसने अपने भरपूर मेहनत और लगन से और दृढ़ किया। हिमा दास की उपलब्धियां आने वाले समय मे भारत के हर युवा को अपने सपने पूरा करने में मदद करेगा। 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.