Tuesday, Nov 30, 2021
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g-20 summit: an exercise to learn and improve through sharing of ideas musrnt

G20 शिखर सम्मेलनः ग्लोबल मिनिमम टैक्स और वैश्विक शासन में सुधार

  • Updated on 11/17/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बदलाव के लिए संभावनाओं और विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण मंच G- 20 का है। जी- ट्वेन्टी एक अंतरसरकारी फोरम जिसमें 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था से संबंधित प्रमुख मुद्दों को हल करने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित करी जाती है।

यद्यपि अंतरराष्ट्रीय संबंध राष्ट्रीय हित को प्राथमिक महत्व देते हैं जिसमें सैन्य वर्चस्व पर बल दिया गया है फिर भी राष्ट्र अब समझते हैं कि वे आर्थिक मुद्दों की अनदेखी नहीं कर सकते क्योंकि वे बहुत महत्वपूर्ण हैं। यही कारण है कि वैश्विक शासन के मुद्दों को हल करने के लिए जी20 मंच पर विचार-विमर्श द्वारा मार्गदर्शन पाया जा सकता है।

हाल ही में जी 20 रोम सम्मिट महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पहली बार था जब नेताओं ने महामारी के बाद गैर- आभासी मोड में मुलाकात की। इसके अलावा, समकालीन दुनिया के संदर्भ में देशों को अपनी अर्थव्यवस्थाओं का पुनर्निर्माण करने की आवश्यकता है जो महामारी के कारण पीड़ित हैं। इसी बैठक में दुनिया की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं ने एक वैश्विक समझौते को मंजूरी दी है जिसमें बड़े व्यवसायों के मुनाफे पर कम से कम 15 फीसदी कर लगेगा।

वैश्विक व्यापार विश्व अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। जब हम रोमन साम्राज्य, सिल्क रूट, अरब व्यापारियों आदि के उदाहरण देखते हैं, तो माल के आदान- प्रदान का पहलू विश्व इतिहास में हमेशा मौजूद था। हालांकि, यह व्यापार आज जटिल हो गया है। किसी भी राष्ट्र के व्यापार ढांचे में वस्तुओं के साथ- साथ सेवाएं भी शामिल होती हैं। प्रौद्योगिकी के उदय ने व्यापार में एक डिजिटल तत्व भी जोड़ा है। कोई भी देश इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकता कि वैश्विक व्यापार के संदर्भ में, राज्य के साथ गैर-राज्य ऐक्टर्स जैसे बहुराष्ट्रीय कंपनियों, विश्व व्यापार संगठन आदि मौजूद है।

वैश्विक व्यापार पर किसी भी चर्चा के लिए यह भी समझना चाहिए कि वैश्वीकरण का उस पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। संचार और तकनीकी विकास के बड़े पैमाने पर विकास के कारण वैश्वीकरण ने विश्व को एक नया मोड़ दिया। दुनिया का एक हिस्सा दूसरे पर निर्भर है और अन्योन्याश्रयता ने अहम योगदान दिया।

हालांकि बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ वैश्विक व्यापार तंत्र ने आय, रोजगार, उत्पादों की विविधता जैसे लाभ दिए लेकिन साथ ही इस बात को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है कि वैश्वीकरण और वैश्विक व्यापार के इस आर्थिक आयाम ने गरीब देशों की तुलना में विकसित देशों को ज्यादा लाभ दिया।

ऐसे समय में जब दुनिया को नया रूप देना है, कमजोरियों को ठीक करके शुरुआत करनी होगी। इसी बात की गुहार अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी लगाई जहां एक तरफ उन्होंने चीन की अनुपस्थिति की निंदा करी और साथ ही ग्लोबल मिनिमम टैक्स के विचार का समर्थन करते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था को फिर से आकार देते हुए कूटनीति को जानता तक लाभ देने की वितरित प्रनाली कहा। पीएम मोदी ने भी 15 फीसदी वैश्विक न्यूनतम कॉर्पोरेट टैक्स पेश करके वैश्विक व्यापार को न्यायसंगत बनाने के G20 के कदम की भी सराहना की जिससे टैक्स की चोरी पर रोक लगाई जा सकती है।

यह देखना महत्वपूर्ण है कि राष्ट्र इस विचार को घरेलू नीतियों में कैसे अनुवादित करते हैं। निस्संदेह हम बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं लेकिन साथ ही, अब दुनिया ऐसी विकास प्रक्रिया को बर्दाश्त नहीं कर सकती है जो बहुतों की तुलना में कुछ का पक्ष लेती है। संतुलित आर्थिक विकास वैश्विक व्यापार के लिए ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के घरेलू पुनर्निर्माण के लिए भी आवश्यक है।

यह कहना कि इस प्रस्तावित सुधार से कर प्रतिस्पर्धा बंद हो जाएगी, सही नहीं होगा। लेकिन इस सुधार विचार के साथ, कम से कम इस पहलू पर ध्यान दिया जाएगा कि वैश्विक व्यापार को पारदर्शी और निष्पक्ष वितरण की आवश्यकता है।यह इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि विश्व शासन में बहुपक्षवाद कितना महत्वपूर्ण है क्योंकि आर्थिक समस्याओं को अकेले राष्ट्रों द्वारा हल नहीं किया जा सकता है।

यहां यह बताना महत्वपूर्ण है कि वैश्विक शासन के विचारों और प्रक्रियाओं की आलोचना यूरोकेंद्रवाद यूरोसेंट्रिज्म, पश्चिमी पूर्वाग्रह से परिभाषित होने के लिए की गई है। इसके अलावा, प्रथम विश्व युद्ध से दूसरे विश्व युद्ध से लेकर शीत युद्ध तक, संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को परिभाषित किया। अब यह संघर्ष केवल सैन्य ही नहीं, बल्कि इसके आर्थिक, स्वास्थ्य, ऊर्जा, तकनीकी सम्बंधित आयाम भी हैं।

वैश्विक शासन का मार्गदर्शन करने के लिए विचारों को नया करने और सुधारने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करते हुए, रोम शिखर सम्मेलन में वैश्विक कॉर्पोरेट न्यूनतम कर का G20 समर्थन प्रशंसनीय है। इसे उद्योग और लोगों के कल्याण की चिंताओं के सही संतुलन के साथ लागू करने की आवश्यकता है।

लेखकः डॉ. अम्ना मिर्जा (दिल्ली विश्व विद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर )

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

 

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