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अब गैस्ट्रिक की दवाओं के रैपर पर लिखा होगा, इसके सेवन से किडनी पर बुरा असर

  • Updated on 11/6/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। आज कल के बाहरी खान-पान से होने वाली गैस्ट्रिक (Gastritis) की समस्या को लोग अनदेखा कर देते हैं। इस समस्या के लक्षणों में भूख कम लगना, चेस्ट में दर्द होना, सांस लेने में दिक्कत होना और पेट फूलने जैसी समस्याएं होना शुरू हो जाती हैं। बिमारी के दौरान ली जाने वाली दवा में पैंटोप्राजोल (Pantoprazole),ओमेप्राजोल (Omeprazole), लैंसाप्राजोल, इसोमेप्राजोल (Esomeprazole), रेबिप्राजोल (Rabeprazole) के साथ-साथ अन्य कई दवाओं के सेवन से किडनी पर इसके दुष्प्रभाव का खतरा बना रहता है।

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वैज्ञानिक संस्था आईपीसी ने किया सूचित
इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मानक संगठन (CDSCO) ने सभी राज्यों के ड्रग्स कंट्रोलर(Drug Controller) को पत्र लिख सूचित किया है। बता दें कि पत्र में कहा गया है कि गैस्ट्रिक से संबंधित दवा बनाने वाली कंपनियां दवा के रैपर पर यह अवश्य लिखें कि इसके इस्तेमाल से किडनी पर असर पड़ सकता है। दरअसल ये मरीजों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए दुष्परिणाम पर कार्य करने वाली वैज्ञानिक संस्था आईपीसी (IPC) ने ये एडवाइज दी है। 

क्यों होती है गैस्ट्रिक की समस्या
बता दें कि आंतों में बैक्टीरिया एकत्रित होने की वजह से पाचन सिस्टम खराब होने लगता है। जिसकी कारण गैस की समस्या होती है। इस समस्या के चलते आपको कब्ज की समस्या, अपच की समस्या, किडनी की समस्या, अपेन्डिक्स की समस्या जैसे मामलों में गैस और पेट फूलने से अलग और भी कई लक्षण दिखाई देते हैं। अगर इस तरह की कोई समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें या किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर इस समस्या के निदान के बारे में बातचीत करें।

गैस्ट्रिक की समस्या से बचने के उपाय

  • वाइन का सेवन न करें, क्योंकि इससे कार्बन डाई ऑक्साइड रिलीज होता है। 
  • ज्यादा तला और मसालेदार भोजन के सेवन से बचें। 
  • तनाव भी गैस बनने का एक मुख्य कारण है, इसलिए तनाव से दूर ही रहने का प्रयास  करें।
  • मौसमी फल और सब्जियों का सेवन करें। 
  • दैनिक रूप से व्यायाम करें।
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