Wednesday, Jan 19, 2022
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जल्द जीडीए खोल सकता है छोटे भूखंडों का पिटारा

  • Updated on 9/1/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। जीडीए कोरोना और रियल एस्टेट सेक्टर में मंदी के असर से अछूता नहीं है। असर ऐसा है कि प्राधिकरण को बड़े ग्रुप हाउसिंग और व्यावसायिक भूखंडों के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। जिसकी वजह से प्राधिकरण के अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। प्राधिकरण किसी भी कीमत पर इन बड़े भूखडों को बेचना चाहता है। ताकि उसकी आय बनी रहे। इसके लिए प्राधिकरण ने नया रास्ता निकाला है। जिसके तहत बड़े भूखंडों का भू-उपयोग परिवर्तित करने के बाद छोटे भूखंड के रूप में बेचा जाएगा। मधुबन बापूधाम, कोयल एंक्लेव सहित अन्य योजनाओं में प्राधिकरण के पास 2 हजार वर्ग मीटर से बड़े 559 करोड़ की कीमत के 30 भूखंड हैं। 

कोयल एंक्लेव से हो रही है शुरूआत 
जीडीए ने अपनी इस योजना की शुरुआत कोयल एंक्लेव से की है। कोयल एंक्लेव में ग्रुप हाउसिंग और शैक्षणिक भूखंड का भू-उपयोग बदला गया है। योजना में ग्रुप हाउसिंग के 5994 वर्ग मीटर भूखंड के भू-उपयोग को व्यावसायिक में परिवर्तित किया गया है। दूसरी ओर 8565 वर्ग मीटर शैक्षणिक भूखंड को सार्वजनिक सुविधाओं में अस्पताल के लिए परिवर्तित किया गया है। अब प्राधिकरण की कवायद भू-उपयोग परिवर्तन के बाद इन बड़े भूखंडों के कई भाग कर नीलामी में शामिल करना है। इससे कोयल एंक्वेल में व्यावसायिक भूखंड या फिर अस्पताल के लिए भूखंड की खोज करने वालों की तलाश खत्म हो सकती है।

पैसा होगा तो आगे बढेंगे प्रोजेक्ट 
पैसों की कमी के चलते प्राधिकरण के कई अहम प्रोजेक्ट अधर में ही लटके हैं। इसलिए इस पहल से उसे दोहरा लाभ होगा। जिसमें उसकी आय बढेगी और साथ ही अधर में लटके प्रोजेक्ट का काम भी। प्राधिकरण को बड़े ग्रुप हाउसिंग और व्यावसायिक की जगह छोटे आवासीय व कॉमर्शियल भूखंडों को आसानी से खरीदार मिल जाएंगे। बड़े 30 भूखंडों की कीमत 559 करोड़ से अधिक है। अगर भूखडों को खरीदार मिलते हैं तो महानगर में विकास से जुड़े आधा दर्जन से अधिक प्रोजेक्ट की रफ्तार में तेजी आएगी। 

अगली बोर्ड बैठक में लाया जाएगा प्रस्ताव 
बड़े भूखंडों का भू-उपयोग परिवर्तन संबंधी प्रस्ताव को जीडीए की आगामी बोर्ड बैठक में रखा जा सकता है। फिलहाल जीडीए के नियोजन और संपत्ति अनुभाग की ओर से मंथन किया जा रहा है। कोयल एंक्लेव का पहला प्रयोग सफल होने के बाद योजना पर गंभीरता से काम किया जाएगा।
 

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