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इंसानी जींस बताते हैं कैसे लड़ेगा कोरोना वायरस से आपका शरीर- शोध

  • Updated on 5/16/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना वायरस के मरीजों पर कई तरह के शोध किए जा रहे हैं। इन रिसर्च में कोरोना बीमारी के कई नए लक्षण सामने आए हैं। माना जा रहा है कि कोरोना वायरस का लोगों पर अगल-अलग तरह से प्रभाव पड़ता है।

लेकिन यह प्रभाव अलग-अलग क्यों है, इन कारणों का वैज्ञानिकों द्वारा पता लगाया जा रहा है। इससे जुड़ी कुछ रिसर्च स्टडीज सामने आई हैं जो इन सभी प्रभावों के लिए ह्यूमन बॉडी में मौजूद जींस को जिम्मेदार मानती हैं।

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क्या है यह शोध
दरअसल, कोरोना के सभी मरीजों में एक जिसे लक्षण नहीं दिखते हैं। किसी में ज्यादा, किसी में कम तो किसी में कई दूसरे तरह के लक्षण दिखाई देते हैं। यही कारण है कि हर रोज दुनियाभर में कोरोना के मरीजों में नए नए लक्षण सामने आ रहे हैं। इसी को आधार मान कर शोध किए गये हैं।

इन रिसर्च में यह जानने की कोशिश की गई है कि क्या इंसानी जींस इसके जिम्मेदार हैं। इसके लिए इंसान के इम्यून सिस्टम में जेनेटिक विविधताओं पर रिसर्च की गई। जिससे पता लगा है कि व्यक्ति के डीएनए में ही अंतर होने के कारण कोरोना का प्रभाव इंसानों पर अलग-अलग तरह से पड़ता है।

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इम्यून सिस्टम से जुड़ा
शोधकर्ताओं ने पाया है कि सभी इंसानों में एक जैसा इम्यून सिस्टम नहीं होता और इसका कारण है हमारा जींस। हम सभी में जींस का अलग अलग संस्करण होता है। जिसे एलेली कहते हैं। यही एलेली किसी रोग या वायरस के प्रति ज्यादा सेंसटिव होते हैं। इसी कारण किसी व्यक्ति का इम्यून सिस्टम कमजोर और स्ट्रोंग होता है।

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बॉडी का अलार्म सिस्टम
शोध के अनुसार, बॉडी में जब वायरस इंसान की कोशिकाओं को प्रभावित करने की कोशिश करता है तब बॉडी इसके जवाब में अपना एंटीवायरस अलार्म सिस्टम शुरू कर देती है। शोध में पाया गया है कि यह अलार्म सभी की बॉडी में एक जैसा नहीं होता। जींस के अलग होने से ये अलार्म भी अलग होता है।

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एलेली पर आधारित
इस शोध में यह भी पता लगा है कि जिसके बॉडी के एलेली कमजोर होते हैं वो कोरोना से जल्दी संक्रमित होते हैं और ऐसी तरह के कमजोर एलेली वाले लोग इबोला, सार्स आदि में भी जल्दी बीमार होने वाले मरीज थे। दरअसल, ये सारा खेल इम्यून सिस्टम का है जो एलेली और हमारे जींस पर आधारित होता है।

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