gold price increased by 30 percent

सालभर में 30 प्रतिशत महंगा हुआ सोना, जारी रहेगी कीमतों में तेजी!

  • Updated on 8/20/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सोने (Gold) के दाम एक साल में करीब 30 प्रतिशत और बीते 2 महीनों में ही 4,000 रुपए प्रति 10 ग्राम से ज्यादा बढऩे से बुलियन डीलर्स के साथ ही आम निवेशक और खरीदार हैरान हैं। बीते हफ्ते 38,648 रुपए प्रति 10 ग्राम की रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद इसके 4,045 और यहां तक कि 50 हजारी होने की अटकलें भी लग रही हैं। यानी कि कीमतों में तेजी जारी रहेगी। यही हाल चांदी का है, जो 45,000 रुपए प्रति किलोग्राम की बुलंदी छू चुकी है। हालांकि आज शुरूआती कारोबार में मल्टी कमोडिटी इंडैक्स (एम.सी.एक्स.) पर अक्तूबर डिलीवरी के सोने के भाव 0.33 प्रतिशत गिरकर 37812.00 रुपए थे और चांदी 274 रुपए नीचे 43,550 रुपए प्रति किलो पर थी। 
मोतीलाल ओसवाल के रिसर्च हैड (कमोडिटी) नवनीत दमानी के मुताबिक कमोडिटी फ्यूचर ट्रेङ्क्षडग कमीशन पोजीशंस के रुझान भी दाम बढऩे के संकेत देते हैं। कुछ महीने पहले नैट शॉर्ट का जोर था, जो कवरिंग और नैट लॉन्ग में बदल चुका है।

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क्या कायम रहेगी तेजी? 
फिलहाल विश्व अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर और अमरीकी मौद्रिक नीति के रुझानों से सोने में तेजी बनी रहने के संकेत मिल रहे हैं लेकिन कई राजनीतिक और आॢथक मोड़ भी दिख रहे हैं, जहां रुझान पलट सकता है। अमरीका में नवंबर 2020 में राष्ट्रपति चुनाव है और सत्ता बदली तो आॢथक नीतियों में भी उथल-पुथल होगी। इससे सोने की कीमतों पर असर का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों राष्ट्रपति ट्रम्प ने चाइनीज सामान पर ऊंची ड्यूटी दरों को 1 सितम्बर की बजाय 15 दिसम्बर से लागू करने की बात कही और दुनियाभर के बाजारों में तेजी और सोने में गिरावट आ गई। 
जानकारों का यह भी कहना है कि सोने की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले भारत में तेजी थोड़ी पीछे है, जबकि पीक घरेलू डिमांड वाला त्यौहारी सीजन अभी बाकी है। बजट में सोने के आयात पर कस्टम ड्यूटी 10 से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत किए जाने से सप्लाई टाइट रहेगी, जिससे कीमतों को और बल मिलेगा।  

क्यों बढ़ रहे सोने के दाम? 
डॉलर पर दबाव अमरीका-चीन व्यापार युद्ध, ब्याज दरों में कटौती और अमरीका में लंबी अवधि (30 साल) की बॉन्ड यील्ड अब तक के सबसे निचले स्तरों पर आने से डॉलर पर दबाव बढ़ा है। ज्यादातर देश अपना मुद्रा भंडार डॉलर में रखते हैं और उनकी कोशिश सोने का भंडार बढ़ाकर आगे ऊंची कीमत पर भुनाने या ज्यादा डॉलर हासिल करने की होती है। इससे भी सोने की डिमांड बढ़ी है।

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ग्लोबल स्लोडाऊन  
दुनियाभर की अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती और कई देशों में मंदी की दस्तक से शेयरों, म्यूचुअल फंडों से निवेशकों का मुनाफा घटा है और जमा योजनाओं के ब्याज पर भी कैंची चल रही है। अब वे गोल्ड जैसे सुरक्षित निवेश को तरजीह दे रहे हैं। इससे बहुमूल्य धातुओं की डिमांड बढ़ रही है।

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सैंट्रल बैंकों की खरीद
 पूरी दुनिया के सैंट्रल बैंकों ने पहली छमाही में 374 टन सोना खरीदा, जो पिछले साल से 68 प्रतिशत ज्यादा है। इस दौरान सोने की कीमत 18 प्रतिशत बढ़ी है। इस साल सोने की कुल डिमांड में सैंट्रल बैंकों की खरीदारी 16 प्रतिशत रही है। 

सोना-चांदी में गिरावट
 दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने का भाव 100 रुपए टूटकर 38,570 रुपए प्रति 10 ग्राम रह गया। औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं का उठाव कम होने से चांदी की कीमत भी 50 रुपए की गिरावट के साथ 45,000 रुपए प्रति किलोग्राम रह गई। वैश्विक स्तर पर न्यूयार्क में सोने का भाव 0.98 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1499 डालर प्रति औंस रह गया जबकि चांदी का भाव 0.18 प्रतिशत घटकर 17 डालर प्रति औंस रह गया। 

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