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‘सरकारी अस्पतालों और स्कूलों’ की दशा सुधारने की दिशा में ‘अच्छे पग’

  • Updated on 7/25/2019

आज सरकारी अस्पतालों (Government Hospital), स्कूलों (Government Schools) आदि में पढ़ाई के स्तर और कुप्रबंध के कारण अधिकांश लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों में ही पढ़ाने और निजी अस्पतालों में ही इलाज करवाने को अधिमान देते हैं।
चूंकि सरकारी अधिकारी और नेतागण तो सरकारी स्कूलों और सरकारी अस्पतालों के निकट फटकते भी नहीं, इस कारण इनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है।

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इसी का संज्ञान लेते हुए कुछ सरकारी अधिकारियों (Government Officers)ने अपने परिजनों के इलाज और शिक्षा के लिए सरकारी अस्पतालों और स्कूलों आदि की ओर रुख किया है जिसके चंद ताजा उदाहरण निम्न में दर्ज हैं : 

  • 09 जनवरी को तिरुनेलवेली (Tirunelveli) जिले की कलैक्टर शिल्पा प्रभाकर सतीश ने अपनी बेटी का दाखिला आंगनबाड़ी केंद्र में करवाया क्योंकि वह चाहती हैं कि उनकी बच्ची समाज के सभी वर्गों के बच्चों के साथ समय बिताए।  
  • इसी प्रकार मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कवर्धा जिले के कलैक्टर अवनीश कुमार शरण ने अपनी बेटी का दाखिला सरकारी स्कूल में करवाया है। 
  • 17 जून को तेलंगाना के विकाराबाद की कलैक्टर मसर्रत खानम आयशा ने अपनी बेटी का पांचवीं क्लास में दाखिला विकाराबाद के सरकारी अल्पसंख्यक आवासीय स्कूल में करवाया है। 
  • 27 जून को मध्य प्रदेश में खंडवा की कलैक्टर तन्वी सुंदरियाल ने अपनी 14 महीनों की बेटी पंखुड़ी को आंगनवाड़ी में दाखिल करवाया। तन्वी का कहना है कि, ‘‘शुरूआत स्वयं से करनी चाहिए।’’ 
  • ‘यदि हम (अधिकारीगण) आंगनबाड़ी केंद्रों को बढ़ावा नहीं देंगे तो आम जन से क्यों उम्मीद रखें।’
  • पंखुड़ी के दाखिले का असर शहर की आंगनबाडिय़ों में देखने को मिल रहा है और संबंधित अधिकारियों ने शहर की आंगनबाडिय़ों की व्यवस्था सुधारने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। 
  • 12 जुलाई को ओडिशा में मलकान गिरी के कलैक्टर मनीष अग्रवाल ने अपनी गर्भवती पत्नी का प्रसव सरकारी अस्पताल में करवाया। 
  • 20 जुलाई को उत्तराखंड में नैनीताल के कलैक्टर एस. बंसल की पत्नी सुरभि बंसल अपनी बीमार बेटी को लेकर सरकारी अस्पताल में पहुंचीं और किसी को अपनी पहचान बताए बिना काऊंटर से पर्ची कटवाने के बाद आम नागरिकों की तरह लाइन में लग कर इलाज करवाया। 

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भले ही ऐसे सरकारी अधिकारियों की संख्या कम है परंतु इनके द्वारा अपने परिजनों के इलाज और शिक्षा के लिए सरकारी संस्थानों की ओर रुख करना अति स्वागतयोग्य कदम है। 
यदि सभी अधिकारी और नेतागण अपने और अपने परिजनों के इलाज और शिक्षा के लिए यही तरीका अपनाएं तो सरकारी अस्पतालों और स्कूलों, आंगनबाड़ी आदि की व्यवस्था जल्दी सुधर सकती है।                                  —विजय कुमार 

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