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स्कूल बैग के भारी वजन से बच्चों को मिली बड़ी राहत, सरकार ने लागू किए ये नियम

  • Updated on 5/6/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। लंबे समय से बच्चों को स्कुल के बैग कि वजह से लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है परन्तु अब उनको आवश्यकता से अधिक बोझ ढोने कि जरुरत नहीं होगी, दरअसल यह मामला कर्नाटक का है जहां सरकार ने शुक्रवार को एक आदेश जारी किया। जिसमें सरकारी, सहायता प्राप्त और बिना मान्यता प्राप्त संस्थानों सहित राज्य के सभी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि स्कूली बच्चों के बैग का वजन बच्चे के वजन के 10% से अधिक न हो।

सरकार के आदेशानुसार कक्षा 1 या 2 में एक छात्र के बैग का वजन 2 किलो से अधिक नहीं होना चाहिए। कक्षा 3 से 5 तक के छात्रों के लिए 2 से 3 किलोग्राम के बीच वजन रखा जा सकता है और कक्षा 9 और 10 में छात्रों को 4-5 किलोग्राम की सीमा में बैग ले जाने की अनुमति दि गई है।

कोई गृहकार्य नहीं

आदेश में यह भी कहा गया है कि कक्षा 1 और 2 के छात्रों को कोई होमवर्क नहीं दिया जाना चाहिए। स्कूलों को पहले से एक समय सारिणी निर्धारित करनी चाहिए, जो उन पुस्तकों की संख्या को सीमित करेगा जिन्हें हर दिन कक्षा में लाया जाना है। सभी क्लासवर्क को स्कूल में ही रखा जाना चाहिए।

स्कूल प्रबंधन को भारी स्कूल बैग से होने वाले स्वास्थ्य के खतरों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए निर्देशित किया गया है। साथ ही आदेश यह भी कहता है कि स्कूलों को कक्षाओं में कुछ स्थान प्रदान करना होगा जहाँ छात्र अपनी नोटबुक और पाठ्यपुस्तकों को संग्रहीत कर सकते हैं। इतना ही नहीं दैनिक भार को कम करने के लिए एक और पीने के पानी की सुविधाओं के लिए प्रावधान करना है ताकि छात्रों को पानी की बोतलें न लेनी पड़े।

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सभी स्कूलों ने सरकार के इस कदम का स्वागत नहीं किया है।

कर्नाटक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के एसोसिएटेड मैनेजर्स ने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि ‘हम अवैज्ञानिक पद्धति पर आपत्ति करते हैं जिसके द्वारा बैग का वजन तय किया गया है। बाजार में उपलब्ध व्यावहारिक अवलोकन और बैग पर विचार नहीं किया गया। हमारी आपत्तियों पर विचार नहीं किया गया।’

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पिछले साल अक्टूबर में सभी राज्यों को बच्चों के स्कूल बैग के वजन को कम करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया था। इसके बाद, प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने एक प्रारंभिक मार्ग-दर्शन अध्ययन किया, जो राज्य शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण निदेशालय और बाल विकास एवं कानून केंद्र, नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया विश्वविद्यालय द्वारा संचालित किया गया था।

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