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सरकारी पैसे पर ऐश करते हैं हुर्रियत के नुमाइंदे, विदेश में पढ़ते हैं बच्चे, जानें पूरी कहानी

  • Updated on 2/18/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल।  पुलवामा में हुए आतंकी हमले से जहां एक ओर पूरा देश दर्द और आक्रोश से भर गया है, वहीं केंद्र और राज्य सरकार दोनों एक्शन में आ गई है। केंद्र सरकार ने भी सुरक्षा कर्मियों को खुली छूट दे दी है। वहीं जम्मू-कश्मीर सरकार ने भी बड़ा फैसला लेते हुए अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा और गाड़ी सब वापस लेने का फैसला किया है। इन नेताओं पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती थी। ये नेता सरकार के पैसो पर करोड़ों रूपये खर्च करती थी सरकार के पैसे पर ये लोग ऐश की जिंदगी जीते थे। 

कब सरकार ने देना शुरू की आलगाववादी नेताओं को सुरक्षा 

1990 और 2002 में बड़े आलगाववादी नेता मीरावाइज फोरूख और अब्दुल गनी लोन पर हमले के बाद सरकार ने अलगाववादियों को सुरक्षा देने का काम किया था। सरकार इन अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा में सालभर में करीब 14 करोड़ रुपये खर्च करती है। 

इस तरह किया जाते है पैसे खर्च

2 करोड़ इन नेताओं की विदेशी दौरे और 11 करोड़ इनकी सुरक्षा, 50 लाख गाड़ियों पर खर्च होता है। इतनी ही नहीं इनकी सुरक्षा के लिए 600 जवानों को तैनात किया गया है। 2018 में जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा पेश किए गए आकंड़ों के मुताबिक, 2008 से लेकर 2017 तक अलगाववादियों को सुरक्षा मुहैया करवाने पर 10.88 करोड़ रुपये खर्च किए गए है। 

कश्मीरियों को भड़का कर खुद के बच्चों को विदेश में पढ़ाते है 

जिन कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के एक इशारे पर लोग सड़कों पर उतर आते हैं। शहर बंद कर देते हैं, पत्थर बरसाते हैं, उनके बच्चे और नाते-रिश्तेदार कश्मीर में नहीं रहते। विदेशों में रहते हैं तमाम सुख-सुविधाओं के साथ। कुछ के परिवार और बच्चे मलेशिया, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में हैं। कइयों के बच्चे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में रहकर या तो पढ़ाई कर रहे हैं या फिर ऊंची नौकरी।

बच्चों के बड़े होते ही उन्हें कश्मीर से बाहर भेज देते है आलगाववादी नेता 

जैसे ही अलगाववादी नेताओं के बच्चे थोड़े बड़े हो जाते हैं, उन्हें कश्मीर से बाहर भेज दिया जाता है।ऐसा कश्मीर के लगभग हर अलगाववादी नेता ने किया है। फिर चाहे वह तहरीक-ए-हुर्रियत के नेता सैय्यद अली शाह गिलानी हों, हिजबुल सरगना सैय्यद सलाउद्दीन हो या फिर दुखतरान-ए-मिल्लत की आसिया अंद्राबी हो। इनके बच्चे कभी किसी प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए हैं। ये न पथराव करते हैं और न ही आतंकी बनते हैं। कई बार तो ऐसा भी देखने में आया है कि इन नेताओं के बच्चे उस दौरान कश्मीर में आए और उन्हें तुरंत वापस भेज दिया गया।

किसी के बच्चे इंजीनियर तो किसी के डॉक्टर 

 एयाज अकबर, हुर्रियत नेता: सैय्यद अली शाह गिलानी गुट के प्रवक्ता एयाज अकबर का बेटा सरवर याकूब पुणे में रहकर मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा है।

फरीदा, दुख्तरान-ए-मिल्लत: महिला अलगाववादी नेता फरीद का बेटा रूमा अफ्रिका में डॉक्टर 2014 के चुनावों मे फरीदा को गिरफ्तार कर लिया गया था।

गुलाम मोहम्मद सुमजी, हुर्रियत नेता: इनका बेटा जुगनू दिल्ली में पढाई कर रहा है। वह कम उम्र में ही दिल्ली भेज दिया गया। रिश्तेदारों के पास रहकर पढ़ाई कर रहा है।

मोहम्मद अशरफ सहराई, हुर्रियत नेता:  कभी गिलानी का उत्तराधिकारी माना जा रहा मोहम्मद अशरफ सहराई का बेटा आबिद दुबई में कम्प्यूटर इंजीनियर है।

मीरवाइज उमर फारूक, हुर्रियत नेता: अमेरिकी मूल की मुस्लिम शीबा मसदी से शादी की है। एक बेटी है, जो मां के साथ अमेरिका में ही रहती है। उसकी बहन राबिया फारूक अमेरिका में डॉक्टर है।

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