Wednesday, Dec 08, 2021
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grahan 2021 list: four new eclipses coming with new year, full lunar eclipse 2021 prsgnt

साल 2021 लेकर आ रहा ग्रहण के चार गजब नजारे, ऐसे होगी साल की शुरुआत....

  • Updated on 12/28/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। आने वाला साल 2021 में खगोल प्रेमियों को काफी रोमांचक दृश्य देखने को मिल सकते हैं। मुमकिन है कि इस साल पूर्ण चंद्रगृहण के साथ-साथ पूर्ण सूर्य ग्रहण भी देखने को मिले। लेकिन यह भी हो सकता है कि यह अनोखे दृश्य भारत में कम दिखाई दें। 

यह भी कहा जा रहा है कि भारत में केवल दो खगोलीय घटनाएं ही देखने को मिलें। इस बारे में जानकारों की राय है कि नए साल की शुरुआत पूर्ण चंद्रग्रहण से होगी। 

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चार रोमांचक दृश्य दिखेंगे 
बताया जा रहा है कि सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की चाल दुनियाभर चार रोमांचक दृश्य दिखा सकती है। हालांकि, भारत में केवल दो खगोलीय घटनाएं ही हो सकती हैं और इसकी शुरूआत पूर्ण चंद्रग्रहण से होगी। 

इस बारे में जानकारों की माने तो 26 मई को लगने वाले पूर्ण चंद्रग्रहण से इन खगोलीय घटनाओं का सिलसिला शुरू हो जाएगा।  जानकारों का कहना है कि नए साल का पहला ग्रहण भारत के पूर्वोत्तर के राज्यों, पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में दिखाई देगा। 

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पृथ्वी की छाया से ढकेगा चांद 
जबकि सिक्किम में यह नहीं दिखेगा। सिक्किम को छोड़कर बाकी राज्य वो हैं जहां चंद्रोदय देश के दूसरे इलाकों के मुकाबले जल्दी होता है। इस घटना के समय चंद्रमा पृथ्वी की छाया से 101.6 प्रतिशत तक ढक जाएगा।

बताते चलें कि जाते-जाते साल 2020 में करीब 800 साल बाद अंतरिक्ष में बृहस्पति-शनि ग्रह एक-दूसरे के काफी करीब देखे गये थे। यह अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए ऐतिहासिक दिन था। यह अनोखा नजारा कल रात को देखा गया था। 

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2020 में दिखाई दिया था अजूबा 
बीती रात बृहस्पति और शनि की इस समय में सबसे बड़ा ग्रह चमकदार तारे की तरह सौरमंडल में दिखाई दिया, जबकि शनि उसके सामने कुछ फीका और छोटा दिखाई दिया। दोनों ग्रह जब कुछ देर के लिए अपनी-अपनी कक्षाओं में एक-दूसरे के सामने आए तो वे एक चमकदार तारे की तरह नजर आए।

यह नजारा अपने आप में काफी दुर्लभ था क्योंकि यह जीवनकाल में एक ही बार आता है। इसीलिए इसे काफी महान संयोग (The Great Conjunction) कहा जा रहा है। यह संयोग 400 साल बाद पड़ा, गुजर रहे ग्रहों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग कोलकाता और पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में एकत्र हुए थे।

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