उनाव घास बनी रोजगार का जरिया, बढ़ा रही ड्राइंग रूम की शोभा

  • Updated on 1/16/2019

श्रीनगर/ब्यूरो। श्रीनगर में पैदा होने वाली उनाव घास रोजगार का जरिया बनी हुई है। यह फूलों के गुलदस्तों के साथ लोगों के घरों की शोभा बढ़ा रही है। उनाव घास को गुलदस्तों की शोभा बढ़ाने के लिए निकुंज ने प्रयोग किया, तो इससे लोगों को भी रोजगार मिला। रोजगार की तलाश में पहाड़ों से पलायन कर रहे युवाओं को श्रीनगर का निकुंज आईना दिखा रहा है। निकुंज फूलों के व्यापार से अपना व दूसरों का जीवन महका रहा है। इसके चलते उनकी मिसाल हर जगह दी जाती है। 

एमकाम और एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने के बजाय निकुंज ने अपना ही रोजगार शुरू करने की योजना बनायी। मैदानों की तरह की पहाड़ों में फूलों के व्यापार को अपना रोजगार का जरिया चुना। इसके चलते वे आज लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। निकुंज ग्रामीणों को फूलों की खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं और अपने हुनर से उन फूलों का गुलदस्ता तैयार कर अपने व दूसरों के लिए रोजगार का जरिया बन रहे हैं।

घास का प्रयोग गुलदस्ते में
ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों के किनारे आम तौर पर उगने वाली घास उनाव को साज सज्जा व गुलदस्ता बना कर निकुंज ने इस घास को भी बाजार उपलब्ध कराया है। उनाव को गढ़वाल में कही उन्यूणा तो कही उनाव नाम से जाना जाता है।

ग्रामीण उपलब्ध कराते हैं फूल
बडियारगढ़, खिर्सू के कास्तकार गेंदा के फूल व स्वीत के गेलेड स्टीक उन्हें उपलब्ध कराते हैं। इसका उन्हें अच्छा दाम भी मिलता है। वहीं खिर्सू व बडियारगढ़ की महिलाएं उन्हें उनाव घास उपलब्ध करवाती हैं।

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