Wednesday, Sep 18, 2019
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जिन गलियों में बिखरती थी रौनक अब पसरा पड़ा है मातम, कुछ ऐसे हैं शहीदों के गांव में हालात

  • Updated on 2/16/2019

नई दिल्ली/अमरदीप शर्मा। गुरुवार की शाम करीब चार बजे जम्मू-कशमीर के पुलवामा में आतंकियों के द्वारा कायरता का खूनी खेल खेला गया। जिसमें 40 भारतीय जवानों ने अपने वतन के लिए जान न्यौछावर कर दी। अपनी जान देकर के वो वीर बलिदानी इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्ण अझरों में लिखवा गए। आज पूरा देश उन नौजवानों की शहादत को सलाम कर रहा है। लेकिन इस हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। कई घरों के चिराग बुझ गए तो कई कई दर्द की कहानियां पीछे छोड़ गए। 

लोगों में पाक के लिए गुस्सा फूट गया है। लेकिन दिल में देश प्रेम की भावना का ज्वार उमड़ रहा है। परिजन अपने बहादुर बेटे को खोने के गम के साथ गर्म महसूस कर रहे हैं कि उनके बेटे ने देश के लिए अपनी जान दे दी। उनका कहना है कि भारत पार को सबक सिखाए। पाक की इस नापाक हरकत ने देश को झकझोर कर रख दिया है।

भावुक मंजर...

इस मंजर का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल सा लगता है।  बूढ़े मां - बाप से उनके बुढ़ापे की लाठी ही छिन गई है। जरा अंदाजा लगाइये उस बेटे के दर्द का जिसनें ठीक से अपने पिता के दुलार का एहसास भी ना किया हो तो उस पत्नी का क्या जिसके हाथों की अभी महंदी भी नहीं छूटी थी। लेकिन भारतीय फौजी अपने इसी बलिदान के लिए हमेशा के लिए अमर हो जाता है। उस नौजवान के परिजन भी अपने अनमोल रत्न की शहादत पर एक तरफ गौरवांनवित हो  रहे हैं तो सीने में आग के सोले जलाकर पाकिस्तना को उडाने की मांग भी कर रहे हैं। 

घरों में पसरा मातम...

देश के जिन नौजवानों ने अपनी जान की कुर्बानियां दी हैं। उनके घर पर मातम छाया हुआ है। शहीद की बूढ़ी मां के रोते -रोते आंसू सूख गए हैं। बहन अपने भाई के इंतजार में बाट जोह रही है। पत्नि अपनी मांग का सिंदूर नहीं पोछ पा रही है। जिस बाप ने अपने कंधे पर बैठाकर अपने लाल को दुनिया दिखाई थी आज वो कंधे असाहय से नजर आ रहे हैं। वो बेटा जिसमें शायद अपने पिता के दुलार को ठीक से महसूस भी नहीं कर पाया हो वो इस बात से अनजान है कि अब वो प्यार उससे छिन गया है। गांव को वो लोग भी इतने ही दुखी हो रहे हैं जो उस जवान को उन  गलियों से आते जाते पर पूछते थे कि बेटा अब कब आओगे। 

शहादत पर गर्व...

अपने लाल को खोने का दुख परिजनों पर पहाड़ की तरह टूट रहा है। लेकिन इसके साथ ही अपने देश के लिए उमड़ रहे प्रेम को भी नहीं रोक पा रहे हैं। उनका कहना है कि हमें अपने बेटे की बहादुरी और देश के लिए मर मिटने के जज्वे पर गर्व महसूस हो रहा है। परिजनों का कहना है कि उन्हें सरकार से किसी भी तरह की सहयोग राशि की जरुरत नहीं है बल्कि उन्हें पाकिस्तान से बदला चाहिए।  
 

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