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gst council meeting likely to be ruckus state governments of non bjp parties united rkdsnt

जीएसटी काउंसिल की बैठक हंगामेदार होने के आसार, गैर भाजपा दलों की सरकारें एकजुट

  • Updated on 8/27/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। जीएसटी परिषद (GST council) की बृहस्पतिवार को होने वाली बैठक हंगामेदार हो सकती है। गैर-भाजपा शासित राज्य, माल एवं सेवा कर (GST) लागू करने के कारण राजस्व में हुए नुकसान की भरपाई के लिये केंद्र पर वादे के अनुसार क्षतिपूर्ति देने को लेकर दबाव बनाने के लिए पूरी तरह से एकजुट हैं। सूत्रों के अनुसार जीएसटी परिषद की 41वीं बैठक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये होगी। बैठक का एकमात्र एजेंडा--राज्यों के राजस्व में कमी की भरपाई है। बैठक में जिन विकल्पों पर विचार किया जा सकता है, उनमें बाजार से कर्ज, उपकर की दर में वृद्धि या क्षतिपूर्ति उपकर के दायरे में आने वाले वस्तुओं की संख्या में वृद्धि, शामिल हैं। 

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सूत्रों ने कहा कि कपड़ा और जूता-चप्पल जैसे कुछ उत्पादों पर उल्टा शुल्क ढांचा यानी तैयार उत्पादों के मुकाबले कच्चे माल पर अधिक दर से कराधान को ठीक करने पर भी चर्चा होने की संभावना है। कोविड-19 संकट ने राज्यों की वित्तीय समस्याएं बढ़ा दी है। बैठक से पहले विपक्षी दलों के राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने बुधवार को इस मामले में साझा रणनीति तैयार करने के लिये डिजिटल तरीके से बैठक की। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जीएसटी परिषद की बैठक में कैसा माहौल होगा, उसका एक तरह से संकेत दे दिया है। उन्होंने विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में बुधवार को आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से माल एवं सेवा कर से जुड़ा मुआवजा देने से इनकार करना राज्यों और जनता के साथ छल है। 

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बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी शामिल हुए। गांधी ने बैठक में कहा, ‘‘ हमें केंद्र सरकार के खिलाफ साथ मिलकर काम करना और लडऩा होगा।’’ केरल, पंजाब और बिहार जैसे राज्य पहले ही कह चुके हैं कि जीएसटी लागू होने के पांच साल तक राज्यों को अगर राजस्व कुछ भी नुकसान होता है, तो केंद्र इसकी भरपाई के लिये नैतिक रूप से बंधा हुआ है। 

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इससे पहले, महान्यायवादी के के वेणुगोपाल ने कहा था कि केंद्र, राज्यों को जीएसटी राजस्व में किसी प्रकार की कमी को पूरा करने के लिये कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। सूत्रों ने पूर्व में कहा था कि वेणुगोपाल की राय के बाद राज्यों को राजस्व की भरपाई के लिये बाजार से कर्ज लेने पर गौर करना पड़ सकता है। इस बारे में जीएसटी परिषद अंतिम निर्णय करेगा। केंद्र सरकार ने मार्च में महान्यावादी से क्षतिपूर्ति कोष में कमी को पूरा करने के लिये जीएसटी परिषद द्वारा बाजार से कर्ज लेने की वैधता पर राय मांगी थी। क्षतिपूर्ति कोष का गठन लग्जरी और अहितकर वस्तुओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाकर किया गया है। इसके जरिये राज्यों को जीएसटी लागू करने से राजस्व में होने वाली किसी भी कमी की भरपाई की जाती है। 

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महान्यायवादी वेणुगोपाल ने यह भी राय दी थी कि परिषद को पर्याप्त राशि उपलब्ध कराकर जीएसटी क्षतिपूर्ति कोष में कमी को पूरा करने के बारे में निर्णय करना है। सूत्रों के अनुसार परिषद के पास कमी को जीएसटी दरों को युक्तिसंगत कर, क्षतिपूर्ति उपकर के अंतर्गत और जिंसों को शामिल कर अथवा उपकर को बढ़ाकर या राज्यों को अधिक उधार की अनुमति देने जैसे विकल्प हैं। बाद में राज्यों के कर्ज भुगतान क्षतिपूर्ति कोष में भविष्य में होने से संग्रह से किया जा सकता है। 

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जीएसटी कानून के तहत राज्यों को माल एवं सेवा कर के क्रियान्वयन से राजस्व में होने वाले किसी भी कमी को पहले पांच साल तक पूरा करने की गारंटी दी गई है। जीएसटी एक जुलाई, 2017 से लागू हुआ। कमी का आकलन राज्यों के जीएसटी संग्रह में आधार वर्ष 2015-16 के तहत 14 प्रतिशत सालाना वृद्धि को आधार बनाकर किया जाता है। जीएसटी परिषद को यह विचार करना है कि मौजूदा हालात में राजस्व में कमी की भरपाई कैसे हो। केंद्र ने 2019-20 में जीएसटी क्षतिपूॢत मद में 1.65 लाख करोड़ रुपये जारी किये। हालांकि उपकर संग्रह से प्राप्त राशि 95,444 करोड़ रुपये ही थी।

 

 

 

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