Monday, Oct 25, 2021
-->
gst-on-petrol-diesel-know-where-the-screw-is-stuck-musrnt

पेट्रोल- डीजल पर GST ! जानिए, आखिर कहां फंसा है पेंच

  • Updated on 9/18/2021

नई दिल्ली/ शिशिर सिन्हा। आखिरकार वही हुआ, जैसी बात कही जा रही थी। पेट्रोल और डीजल पर जीएसटी लगाने का फैसला फिलहाल टाल दिया गया। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित जीएसटी काउंसिल की 45 वीं बैठक में राज्य और केंद्र सरकार ने माना कि अभी इस तरह के फैसले के लिए सही समय नहीं है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह मुद्दा मुख्य रूप से केरल उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक ही बैठक के एजेंडे में शामिल किया गया था। एक जनहित याचिका के आधार पर न्यायालय ने कहा कि जीएसटी काउंसिल छह सप्ताह के भीतर-भीतर इस बारे में फैसला करे। अब न्यायालय को काउंसिल के फैसले के बारे में जानकारी दे दी जाएगी।

अब सवाल उठता है कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाने पर पेंच कहां फंसा हुआ है? यहां पर कुछ तकनीकी मुद्दों का जिक्र करना जरूरी होगा। जीएसटी के तहत किसी भी वस्तु या सेवा पर कर की दर तय करने के लिए यह देखा जाता है कि पुराने कर की दर कितनी थी और नई दर कुछ इस तरह तय की जाए जिससे केंद्र या राज्य को किसी तरह का नुकसान नहीं हो।

जीएसटी कर्मचारियों का छलका दर्द, कहा हमें पता ही नहीं करना क्या

तकनीकी भाषा में इस दर को रेवेन्यू न्यूट्रल रेट यानी आरएनआर कहा जाता है। पेट्रोल और डीजल पर केंद्र और राज्यों की ओर से लगाए जाने वाले कर को देखें तो पेट्रोल पर आधार कीमत के हिसाब से कर की दर 137 फीसद तक पहुंच जाती है, जबकि डीजल पर 100 फीसद के करीब।

अब जीएसटी में सबसे ऊंची दर 28 फीसद है, अब उसमें सेस भी जोड़ दिया जाए तो यह हो जाएगी 50 फीसद। मतलब 50 फीसद तक की दर की व्यवस्था जीएसटी में है, जबकि मौजूदा दर दोगुना या उससे भी ज्यादा है। तो क्या केंद्र और राज्य सरकारें इतना घाटा उठाने को तैयार होंगी? ऐसा बिल्कुल नहीं लगता। 

खास तौर पर कर से कमाई देखेंतो केंद्र सरकार को तीन लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा की सालाना कमाई है, जबकि इस साल के पहले तीन महीने में ही यह रकम 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुकी है। राज्यों की कमाई दो लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की है। केंद्र और राज्यों की कमाई का बड़ा हिस्सा पेट्रोल-डीजल से आता है तो वो इसमें कैसे कमी कर सकते हैं?

GST कलेक्शन में बनाया रिकार्ड, अगस्त में 1.12 लाख करोड़ का संग्रह

दिलचस्प बात यह है कि जीएसटी के लिए हुए संविधान संशोधन कानून के जरिए शराब को तो इस व्यवस्था से बाहर रखा गया, लेकिन पेट्रोल और डीजल के लिए यह बात नहीं। हालांकि यह जरूर जोड़ दिया गया कि जीएसटी कांउसिल तय करेगी की जीएसटी किस तारीख से लागू होगी। 

दूसरे शब्दों में कहें तो जीएसटी लगेगा यह तो तय है, लेकिन कब से लगेगा यह तय नहीं। यही वह पहलू है जिसकी आड़ में केंद्र और राज्य सरकारें प्रस्ताव को टालती रही हैं। इस पूरे मामले में उपभोक्ता को कई तरह से नुकसान उठाना पड़ता है। एक तरफ जहां पेट्रोल व डीजल के दाम बढऩे से सामान की ढुलाई का खर्च बढ़ता है, जिससे कीमत बढ़ती है।

दूसरी ओर कंपनियों को सामान तैयार करने या सेवा मुहैया कराने में पेट्रोल और डीजल पर होने वाले खर्च के एवज में इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा नहीं मिलता। नतीजा पूरी लागत अंतिम कीमत में जुड़ जाती है, जिसका बोझ ग्राहक को ही उठाना पड़ता है। 

यह तो साफ है कि पेट्रोल- डीजल पर जीएसटी को लेकर चर्चा गरमाती रहेगी, विपक्ष आवाज उठाएगा और केंद्र सरकार उनकी मांगों को जायज मानेगी, लेकिन फैसला कब होगा? शायद इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.