Thursday, Dec 08, 2022
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जानें कब है गुप्त नवरात्रि, जब 30 साल बाद शनि अपनी मकर राशि में रहेगा

  • Updated on 1/25/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। हिंदू धार्मिक मान्याता के अनुसार शनिवार, 25 जनवरी से माघ (Magha) मास की नवरात्रि (Navratri) शुरू हो रही है। इसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। दरअसल एक साल में चार बार नवरात्रि आती है। इनमें दो सामान्य और दो गुप्त होती हैं। चैत्र-आश्विन मास की में सामान्य और माघ-आषाढ़ में गुप्त नवरात्रि आती है।

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माघ मास के शुक्ल पक्ष में गुप्त नवरात्रि
बता दें कि 23 जनवरी को शनि मकर राशि में 30 साल बाद प्रवेश करेगा। मकर शनि की ही राशि है। माघ मास के शुक्ल पक्ष में गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। इन दिनों में देवी मां के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।

सोमवार, 3 फरवरी को नवमी तिथि रहेगी। जिसको बहुत कम लोग ही जानते हैं। इस नवरात्री को करने से जीवन में शुख समृद्धि का आगमन होता है। 

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इस नवरात्रि में देवी मां के जीन नौ स्वरूपों की पूजा
होती है वे है शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री। इन नौ स्वरूपों की विशेष पूजा अलग-अलग दिन की जाती है।

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कादि, हादि, सादि क्रम से उपासना
गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्या की भी पूजा होती है। ये महाविद्याएं हैं मां काली, तारा देवी, षोडषी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, और कमला देवी। इन विद्याओं की कादि, हादि, सादि क्रम से उपासना की जाती है।

कालीकुल के अंर्तगत काली, तारा एवं धूमावती मानी गई है। शेष विद्याएं श्रीकुल के अंर्तगत मानी गई हैं। इसमें ध्यान रखें कि दस महाविद्याओं की पूजा योग्य गुरु के बिना नहीं करनी चाहिए।

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इन चीजों से मां को लगाए भोग
देवी मां को इश गुप्त नवरात्रि में विशेष भोग लगाया जाता है। मां शैल पुत्री को गाय के दूध से बने व्यजनों से भोग लगाना चाहिए। ब्रह्माचारणी को मिश्री जैसे मिठे भोग लगाने चाहिए। मां चंद्रकटा को दूछ से बनी चीजों से भोग लगाना चाहिए। 

मां कूष्मांडा को शुद्ध देसी घी से बने मालपुए का भोग लगाना चाहिए। मां स्कंदमाता को केले अर्पित करें, और मां कात्यायनी को शुद्ध शहद का भोग लगाए। मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाए, और मां महागौरी को नारियल चढ़ना चाहिए। मां दूर्गा को हलवा-पूरी अर्पित करें।

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