Wednesday, Oct 16, 2019
guru dutt death anniversary

पुण्यतिथी: जब पहली बार कोठे पर गए थे गुरु दत्त, गर्भवती महिला को नाचते देख हो गए थे हैरान

  • Updated on 10/10/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारतीय सिनेमा के दिग्गज एक्टर और डायरेक्टर रहे गुरु दत्त (Guru Dutt) पहले ऐसे निर्देशक थे जो कि फिल्मों में खामोशी भरे सीन को भी लाइट और कैमरा की मदद से सफल बना देते थे। उन्होंने उस दौर में सिनेमा की बारीकियों को दर्शकों से रूबरू करवाया और इसमें उनका हर वक्त साथ निभाया मशहूर निर्देशक और पटकथा लेखक अबरार अल्वी (Abrar alvi) ने।

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जब पहली बार कोठे पर गए थे गुरु दत्त
आज हम आपको गुरु दत्त के जीवन से जुड़े कुछ ऐसे किस्सों से रूबरू कराएंगे जिनके बारे में शायद ही आपने कभी सुना होगा। फिल्म 'प्यासा' (Pyasa) के शुरुआती दिनों में ये फैसला लिया गया था कि फिल्म की कहानी किसी कोठे पर आधारित होगी। लेकिन इसमें एक दिक्कत थी, गुरु दत्त कभी कोठे पर नहीं गए थे। वहीं फिल्म के लिए वो जब कोठे पर गए तो वहां का नजारा देखकर हैरान रह गए।

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गर्भवती महिला को कोठे पर नाचते देख हो गए थे हैरान
जिस कोठे पर गुरु दत्त गए थे वहां नाचने वाली लड़की तकरीबन 7 महीनों की गर्भवती थी। फिर भी वहां मौजूद लोग उसे नचाए जा रहे थे। ये मंजर देख गुरु दत्त वहां से उठे और अपने दोस्तों से कहा, "चलों यहां से"। जाते समय वो नोटों की गड्डी वहीं रखकर बाहर निकल आए। इन सबको देखने के बाद दत्त ने कहा कि उन्हें 'साहिर' के गाने के लिए चकले का सीन मिल गया और वो गाना था 'जिन्हें नाज है हिंद पर वो कहां है'।

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इसलिए मुस्लिम दर्शकों का रखते थे खास ख्याल
इसी के साथ कहा जाता है कि गुरु दत्त को मुस्लिम दर्शकों की पसंद-नापसंद का पूरा ख्याल था। उन्हें ये बात पता थी कि अगर मुसलमान दर्शक को कोई फिल्म पसंद आ जाए तो वो उसे बार-बार देखने जाते हैं। बस उनकी इसी पसंद का ख्याल रखते हुए दत्त नें 'चौदहवीं का चांद' फिल्म बनाई थी।

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इस फिल्म को सही मायने में मुसलमानों की सामाजिक फिल्म कहा जाता है। आपको बता दें कि गुरुदत्त का असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था। बेशक ही गुरुदत्त अपने इस जन्मदिन पर हम सबके बीच नहीं हैं, लेकिन फिर भी सबके दिलों में अपनी खास जगह छोड़ गए हैं।

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गुरु दत्त का जन्म बेहद गरीबी और तकलीफों में बीता था। पढ़ाई में अच्छे होने के बावजूद परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण वह कभी कॉलेज नहीं जा सके। लेकिन कला के क्षेत्र में कड़ी मेहनत और लगन से उन्होंने फिल्म निर्माता और निर्देशक के रूप में अपनी पहचान बनाई। 

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