Monday, Oct 22, 2018

गुरुद्वारा कमेटी में घोटालों पर गरमाई सिख सियासत 

  • Updated on 10/11/2018

नई दिल्ली/सुनील पाण्डेय। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में हुई आर्थिक गड़बडियों को लेकर सियासत गरमा गई है। विपक्षी दल शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) ने लगातार तीसरे दिन इस मसले को तूल दे दिया। साथ ही इसको लेकर दिल्ली सरकार का दरवाजा खटखटाया है। साथ ही दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल को चिट्ठी भेजकर दिल्ली कमेटी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके की सदस्यता खत्म करने की मांग कर डाली है। 

वहीं दूसरी ओर विपक्ष के आरोपों का सटीक रास्ता निकालने और संगत के बीच सही मैसेज देने को लेकर दिल्ली कमेटी के पदाधिकारी माथा पच्ची में जुट गए हैं। बुधवार को कमेटी मुख्यालय रकाबगंज साहिब में कई घंटें तक इस मसले से निपटने के लिए बैठकें होती रहीं।

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बैठक में कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका से लेकर पदाधिकारी हर मुद्दे पर चर्चा की। लेकिन, देर शाम से कोई सफलता नहीं मिली। कमेटी में हुए घोटालों का खुलासा करने वाले कमेटी के पूर्व महासचिव एवं वर्तमान निर्दलीय सदस्य गुरमीत सिंह शंटी एवं शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना पर भी दबाव बनाने और उन्हें झूठा साबित करने में जुट गए हैं।

सूत्रों की माने तो कमेटी के अधिकारी इस लिए भी हैरान हैं कि गोपनीय रिकार्ड इन विपक्षी दलेों तक किसने पहुंचाए। हालांकि, शह की सुई एक ही ओर जा रही है, लेकिन नाम कोई नहीं ले रहा है। इन सब के बीच विपक्षी दल शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) ने दिल्ली सरकार से गुहार लगाई कि घोटाला करने वाले कमेटी अध्यक्ष को अब पद बने रहने का अधिकार नहीं है। 

पत्र के जरिये सरना दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष इन्दर मोहन सिंह ने आरोप लगाया कि दिल्ली कमेटी के प्रधान मनजीत सिंह जीके ने फर्जी कंम्पनियों से लाखों रुपयों के घठिया देसी घी की खरीद करने तथा फर्जी प्रिटिंग प्रैसों से लाखों रुपयों की धार्मिक पुस्तकों की छपाई करवाकर गुरु की गोलक को बर्बाद किया है। 

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3 लाख के सफारी सूट खरीदे
दिल्ली सिख गुरुद्वारा एक्ट 1971 के अधीन दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंन्धक कमेटी के कामकाज को चलाने के लिये बनाये गये नियमों की धारा 14 के अनुसार दिल्ली कमेटी का कोई सदस्य अथवा उसके परिवार का सदस्य अथवा रिश्तेदार कमेटी से कोई व्यवसाय संम्बन्ध अथवा कारोबारी लेन-देन नहीं कर सकता है।

जबकि कमेटी प्रधान जीके ने नियमों की घोर अवहेलना करते हुये जून 2017 में अपने ग्रेटर कैलाश के अपने रिहायशी पते पर स्थित कंपनी बनाकर फर्म से 3 लाख 15 हजार रुपए के 50 सफारी सूट खरीदे, जिसके निदेशक जीके की पुत्री व दामाद बताये जाते हैं।

प्रधान जीके ने अपने ही हस्ताक्षरों से उस बिल को पास करके चैक द्रारा अदायगी भी कर दी। जबकि यह कंपनी मार्च 2015 से बन्द हो गई है। इन्दर मोहन सिंह ने आरोप लगाया कि अभी तक यह रहस्य बना हुया है कि यह 50 सफारी सूट गुरु की गोलक से भुगतान करके किसके लिये खरीदे गये थे।

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