Wednesday, May 12, 2021
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Hanuman Janmotsav 2021: अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों के दाता ‘रामदूत हनुमान’

  • Updated on 4/26/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कलियुग में हनुमान जी उपासना से शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं। हनुमान जी आज इस धरती पर सशरीर मौजूद हैं।
 ‘‘मंगल को जन्मे मंगल ही करते मंगलमय हनुमान।’’
माता जानकी ने हनुमान जी को अमरत्व का वरदान दिया था। यही कारण है कि हर युग में वह भगवान श्री राम के भक्तों की रक्षा करते हैं। हनुमान चालीसा की एक चौपाई के अनुसार माता जानकी जी से इन्हें ऐसा वरदान मिला है जिससे वह किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते हैं। 

जब प्रभु श्री राम ने अपनी मृत्यु की घोषणा की तो यह सुनकर हनुमान जी बहुत आहत हुए। वह माता सीता के पास गए और कहा, ‘‘हे माता आपने मुझे अजर- अमर होने का वरदान तो दिया परन्तु एक बात बतलाएं, जब मेरे प्रभु ही इस धरती पर नहीं होगे तो मैं यहां क्या करूंगा? मुझसे अपना दिया हुआ वरदान वापस ले लीजिए।’’ 

माता सीता के सामने हनुमान जी जिद पर अड़ गए तब सीता जी ने श्री राम का स्मरण किया और श्री राम ने प्रकट होकर हनुमान जी को गले लगाते हुए कहा, ‘मुझे पता था कि तुम सीता के पास आकर ऐसा ही कहोगे। जब इस पृथ्वी पर कोई भी नहीं होगा तो राम नाम लेने वालों का बेड़ा तुम्हें ही पार लगाना है। इसिलिए तुम्हें अमरत्व का वरदान दिलवाया गया है।’ 
तब हनुमान जी ने अपने अमरत्व के वरदान को समझा और प्रभु श्री राम की आज्ञा मान कर आज भी पृïथ्वी पर विराजमान हैं। 

भगवान श्री राम के कार्य सिद्ध करने वाले हनुमान जी साक्षात रुद्रावतार और संकट मोचन हैं। भगवान शिव ने भगवान राम को अपना परम उपास्य तथा ईष्ट देवता माना परन्तु साक्षात नारायण ने जब नर रूप धारण कर श्री राम के नाम से अवतार ग्रहण किया तो शंकर जी शिव रूप में नर रूप की कैसे आराधना कर सकते थे। 

इसीलिए श्री राम की भक्ति के लिए भगवान शिव ने लिया हनुमान का रुद्र अवतार और हनुमान जी वानर राज केसरी के यहां माता अंजनी के गर्भ से जन्मे। केसरी नंदन हनुमान जी अतुलित बल के प्रतीक हैं। उनका बल दूसरों के कार्य सिद्ध करने और दुखों को दूर करने के काम आता है।

यदि सच्चे मन से महाबलि पवनपुत्र हनुमान जी की आराधना की जाए तो वे अपने भक्तों का हर मनोरथ पूर्ण कर देते हैं। रामभक्त श्री हनुमान जी अपने भक्तों की पीड़ा हरने वाले तथा श्री रामायण रूपी महामाला के महारत्न माने जाते हैं। 
इनका चरित्र एक जीवन दर्शन है जिसका चिंतन, मनन, श्रवण करने से लोक- परलोक सुधर जाता है।

हनुमान उपासना जीवन में सफलता प्राप्त करने की कुंजी है। आज संसार में जहां भी राम कथा होती है वहां पवन पुत्र हनुमान जी उपस्थित रहते हैं। रुद्रावतार हनुमान जी को सभी देवताओं का वर प्राप्त है। विष्णु जी ने उन्हें अत्यंत निर्भय, ब्रह्मा जी ने कल्प पर्यंत चिरंजीवी कहा है। भोले भंडारी भगवान शिव ने कहा कि जब मेरे तीसरे नेत्र से उत्पन्न अग्नि सभी शत्रुगण को भस्म कर देगी, उस समय वह अग्नि भी इस बालक का कुछ भी अनिष्ट नहीं कर पाएगी। मेरे अमोघ शूल आदि अस्त्र-शस्त्र भी इसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते।

ब्रह्मा जी ने वरदान दिया कि मेरे ब्रह्मास्त्र, ब्रह्मदंड, ब्रह्मपाश तथा अन्य अस्त्र भी इस बालक को कोई भी नुक्सान नहीं पहुंचा सकेंगे। इंद्र ने वर दिया, मैं वर देता हूं कि आज से मेरा अमोघ वज्र भी इसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकेगा। इसका शरीर वज्र के समान होगा। 

इसी प्रकार यम ने वरदान दिया कि मेरे काल दंड का भी इसे भय नहीं रहेगा। कुबेर ने वरदान दिया कि पवन पुत्र के द्वारा असुरों का विनाश होगा। वरुण ने इन्हें वरदान दिया कि यह मेरे समान शक्तिशाली होंगे। यह भयंकर युद्ध में कोई थकावट महसूस नहीं करेंगे। 

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