Friday, Jan 28, 2022
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B'day Special: इस बड़ी फिल्म के कारण हुआ था राखी और गुलजार के बीच अलगाव

  • Updated on 8/14/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल।  'मेरे करन-अर्जुन आएंगे' -बॉलीवुड की किताब में शुमार यह आइकॉनिक डॉयलोग हर किसी को याद है। जिस इंटेंसिटि से राखी गुलजार ने बड़े पर्दे पर इस डॉयलोग को कहा था वो आज भी लोगों के जहन में बसा हुआ है। अपने अभिनय से बॉलीवुड में एक दिग्गज अदाकारा के रुप में पहचान बनाने वाली राखी का आज जन्मदिन है। आज वे 71 साल की हो गईं हैं। 15 अगस्त 1947 को आजादी के दिन जन्मी राखी मजूमदार ने अपने फिल्मी करियर में इंडस्ट्री को कई बेहतरीन फिल्में दी हैं। पर्दे पर खूबसूरत और चुलबुली दिखने वाली राखी के असल जीवन मुश्किलों से कम नहीं था। आइए जानते हैं उनके बर्थडे पर उनसे जुड़ी कुछ खास बातें।


माछी झोल ने बनाया करियर

राखी का जन्म बंगाल के नादिया जिले के रानघाट में बंगला परिवार में हुआ था। राखी के पिता एक कारोबारी थे और मां एक गृहिणी। कहा जाता है जब राखी बहुत छोटी थीं तो उनके घर के पास एक बंगला फिल्म की शूटिंग चल रही थी, जिसमें अभिनेत्री संध्या राय अभिनय कर रही थी। संध्या राय को माछी झोल बहुत पसंद थे और राखी की मां बहुत अच्छा माछी झोल बनाती थी। राखी की मां अपने संबंधों के कारण संध्या राय के लिए माछी झोल बनाती थीं। इससे उनके रिश्ते और गहरे हुए। यही राखी के लिए फिल्मों में एंट्री प्वाइंट बना और यहीं से उन्होने अपनी पहली बांग्ला फिल्म 'बधू बरन' में काम करने का मौका मिला।

Navodayatimesबंगाली फिल्मों से शुरू हुआ राखी का करियर एक साल में ही बॉलीवुड तक जा पहुंचा। उन्होंने साल 1970 में धर्मेंद्र के साथ फिल्म 'जीवन मृत्यु' से बॉलीवुड में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने शशि कपूर के साथ फिल्म की 'शर्मिली'। 1971 में आई इस फिल्म के बाद तो मानों राखी की किस्मत ही बदल गई। इस साल फिल्म 'शर्मिली' समेत 'लाल पत्थर' और 'पारस' तीनों फिल्में सुपरहिट रही थीं। 

जब डायरेक्टर ने रसीद किया झापड़

बॉलीवुड में डेब्यू करने से पहले फिल्म 'जीवन मृत्यु' के डायरेक्टर सत्येन बोस ने राखी को एक मीटिंग के लिए बुलाया। राजश्री प्रोडेक्शन बैनर के तहत बन रही इस फिल्म में राखी का छोटा सा रोल था, जिसके लिए राखी को डायरेक्टर सत्येन बोस ने बुलाया था। हालांकि राखी इससे पहले बंगाली फिल्मों में काम कर चुकी थीं। राखी को डायरेक्टर सत्येन बोस ने उनके रोल के बारे में बताया, जिस पर राखी ने फट से हां कह दी। 

Navodayatimesराखी ने एक इंटरव्यू में इस फिल्म के बारे में बात करते हुए बताया कि वह फिल्म 'जीवन मृत्यु' की शूटिंग कर रही थी तो वह उस समय एक सीन सही से नहीं कर पा रही थी। कई टेक्स देने के बाद भी उनसे वो सीन नहीं हो पाया, जिससे परेशान होकर डायरेक्टर सत्येन बोस ने उन्हें झापड़ रसीद कर दिया। 

यह फिल्म थी राखी और गुलजार के अलगाव का कारण

गुलजार और राखी की मुलाकात एक फिल्मकी पार्टी के दौरान हुई थी। गुलजार को शुरू से ही बांग्ला संस्कृति, रीति-रिवाज के प्रति आकर्षण था और इसी कारण वे राखी की ओर खींचे चले गए। दोनों 15 मई 1973 को शादी के बंधन में बंध गए। ये वो दौर था जब राखी अपने करियर के चरम पर  थीं। कहते है कि दोनों का विवाह एक समझौते पर हुआ था कि राखी शादी के बाद फिल्मों में काम नहीं करेंगी।

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प्यार में पड़ी राखी तब गुलजार की बात मान गईं, लेकिन मन ही मन वह उम्मीद लगाए बैठी थीं कि तीन-चार साल बाद वह गुलजार को मना फिल्मों में लौट आएंगी, पर ऐसा नहीं हुआ। वह जब भी गुलजार से फिल्मों की बात करती तो वह उन्हें शांत करा देते। राखी को फिल्मों में कास्ट करने के लिए उन दिनों बड़े-बड़े प्रोड्यूसर-डायरेक्टर उन्हें ऑफर देते थे। ऐसा ही ऑफर मशूहर निर्माता-निर्देशक  यश चोपड़ा ने भी उन्हें दिया, जिसे राखी ने बिना गुलजार से पूछे साइन कर लिया और यही दोनों के अलगाव का कारण बना। 

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