Wednesday, Apr 14, 2021
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haridwar is the penance of the creator of the world musrnt

सृष्टि के रचयिता की तपस्थली है हरिद्वार, हरकी पैड़ी पर की थी तपस्या

  • Updated on 4/3/2021

हरिद्वार/योगेश योगी। कुंभ नगरी हरिद्वार सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी की तपस्थली रही है। जहां आजकल  हरकी पैड़ी है वहीं पर ब्रह्मकुंड में ब्रह्मा जी ने तपस्या की थी। हरकी पैड़ी और हरिद्वार के साथ अन्य कई धार्मिक कथाएं जुड़ी हुई हैं।

हरिद्वार में हरकी पैड़ी पर मुख्य कुण्ड ब्रह्मकुंड  है। इस स्थान पर ब्रह्मा जी द्वारा तपस्या का वर्णन आता है। यहीं पर हरि पादुकाई बनी हुई है। भगवान शिव के ससुराल कनखल हरिद्वार में ही है। शिव की पत्नी देवी सती के पिता दक्ष के यज्ञ विध्वंस के बाद दक्ष को पुनर्जीवन देकर दक्षेश्वर महादेव की स्थापना का प्रसंग आता है।

स्कंद पुराण के केदारखंड में  लिखा है कि कनखल में दक्षेश्वर और माया देवी मंदिर के दर्शन के बिना तीर्थाटन निष्फल होता है। भगवान राम के सूर्यवंशी पूर्वज राजा भागीरथ से जुड़ा गंगा का प्रसंग हो या रावण के वध के बाद भगवान राम द्वारा हरिद्वार सहित कई धर्म स्थलों पर पंडा परंपरा की स्थापना करना ऐसी पौराणिक कथाएं हैं,जो हरिद्वार की पौराणिकता को स्पष्ट करती हैं। इतना ही नहीं भगवान कृष्ण, अर्जुन और पांडवों से जुड़ी सैकड़ों कहानियों के संदर्भ उपलब्ध हैं।

ऐसा नहीं कि हरिद्वार सिर्फ हिंदू धर्म अवतारों और मान्यताओं से जुड़ा है। सिख धर्म के कई पातशाहियों के हरिद्वार आने और धार्मिक आयोजनों का वर्णन मिलता है। उत्खनन में मौर्य काल के कुछ साक्ष्य पाए जाने के कारण यह माना जाता है कि हरिद्वार एक समय चंद्रगुप्त मौर्य शासन का हिस्सा रहा। इस बात का आधार जनपद देहरादून के कालसी और खिजराबाद, ग्राम टोपरा से प्राप्त शिलालेखों को माना जाता है।
 

विक्रमादित्य के भाई ने की थी तपस्या
 विक्रम संवत के संस्थापक उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के बड़े भाई राजा भतृहरी ने अपने गृहस्थ जीवन से विमुख होकर हरिद्वार में कई जगह पर तपस्या की। उन जगहों में प्रमुख रूप से हरकी पैड़ी और गुरु गोरखनाथ की गुफा है। अपने बड़े भाई भतृहरि की स्मृति में राजा विक्रमादित्य की ओर से गंगा के किनारे बनवाई गई कंक्रीट की सीढ़ियों को नाम दिया गया था भतृहरी की पैड़ी। जो कालांतर में उच्चारण के भ्रंश होने से हरकी पैड़ी हो गया। यानि यह हरिद्वार नगर में संभवत पहला सार्वजनिक कंस्ट्रक्शन माना जाता है।

यात्रा वृतांत में मिलता है हरिद्वार का जिक्र

राजा हर्षवर्धन के शासनकाल में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वृतांत में हरिद्वार का विस्तृत वर्णन किया है। चंद्रबरदाई के पृथ्वीराज रासो से लेकर आईने अकबरी में अबुल फजल ने अकबर काल के वृतान्त में हरिद्वार का विस्तृत वर्णन किया है। ब्रिटिश सरकार द्वारा संचालित आर्कलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डायरेक्टर जनरल पुरातत्व वेता अलक्जेंडर कंनिगम ने हरिद्वार आकर कई सर्वे किए।

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