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हार्ले डेविडसन ने छोड़ा भारत, 4 साल में जाने वाली 7वीं बड़ी कंपनी आखिर क्यों हो गई फेल.....

  • Updated on 9/25/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। लोगों की चहेती बाइक हार्ले डेविडसन ने अब भारत से जाने का फैसला किया है। अमेरिका की इस मशहूर बाइक कंपनी ने भारत में अपने बढ़ते घाटे को देखते हुए ये फैसला लिया है। कंपनी अब पूरी तरह से विदेशी बाजारों में ही अपना फोकस रखेगी। 

दरअसल, हार्ले डेविडसन कंपनी को बीते फाइनेंसियल ईयर में अपनी सेल में 22% की गिरावट देखने को मिली थी। ऐसे में कंपनी ने भारत को छोड़कर जाने और अमेरिका में अपने कारोबार को बढ़ाने का फैसला लिया है। बताते चले कि हरियाणा के बावल में हार्ले डेविडसन की असेंबलिंग यूनिट थी। 

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बढ़ता गया घाटा 
2019 में हार्ले डेविडसन ने सिर्फ 2,676 बाइक्स ही बेची थीं। इनमें 65 फीसदी हिस्सेदारी 750 सीसी बाइक्स की है, जिनकी असेंबलिंग हरियाणा में होती थी। यहां ये भी बता दें कि बीते 4 सालों में भारत के बाजार को छोड़ने वाली हार्ले डेविडसन 7वीं बड़ी विदेशी ऑटोमोबाइल कंपनी है। भारत में बढ़ते घाटे के बाद ये बड़ी कंपनियां भारत के बाजार छोड़ रही है। 

इन कंपनियों ने भी छोड़ा भारत 
हार्ले डेविडसन से पहले जनरल मोटर्स, फिएट, सांगयोंग (Ssangyong), स्कैनिया, मैन (MAN)  और यूएम मोटरसाइकिल्स (UM Motorcycles) भी भारत के बाजार को छोड़ चुके हैं।

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आखिर क्यों  हुआ ऐसा?
जानकारों की माने तो भारत से इन बड़ी कंपनियों के जाने का सबसे बड़ा कारण है कि इन कंपनियों को भारतीय बाजार और उसकी जरूरतों की समझ नहीं है। जिसे मारुति सुजुकी ने सबसे अच्छे तरीके से समझा और उसने बाजार का 50% मार्केट शेयर लंबे समय से अपना बनाया हुआ है। 

दरअसल, मारुति सुजुकी ने ग्राहकों की मानसिकता को समझा और जाना है। मारुति की 800 से लेकर ऑल्टो, वैगनआर, स्विफ्ट जैसी कारों ने बाजारों में धूम मचाई है। इसकी बड़ी वजह यही रही कि ये करें कम दाम में पर्याप्त फीचर्स के सतह आसानी से उपलब्ध हैं।

मारुती सुजुकी के आगे टोयोटा मोटर्स, फोर्ड, फॉक्सवैगन, रेनॉ निसान जैसी कंपनियों का भारत के बाजारों में काफी कम कारोबार रहा है। जिसकी वजह है मारुती द्वारा छोटी कारें बाजारों में उतारना, क्योंकि छोटी कारों की सबसे ज्यादा मांग है। ये कंपनी पर्याप्त फीचर्स के साथ ग्राहकों को उनके बजट में गाड़ी देती है।

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फेल हो रहीं दिग्गज कंपनियां
बाइक कंपनियों की बात करें तो हीरो और बजाज जैसी कंपनियों ने भारत में अपनी जो जगह बना ली वो जगह हार्ले डेविडसन कभी नहीं बना पाई। बाजार के जानकार कहते हैं कि इन कंपनियों के बोर्ड मेंबर डेट्रॉयट, वॉल्फसबर्ग और टोक्यो में बैठकर योजनाएं तैयार करते हैं जो भारत के ग्राहकों के सामने फेल हो जाती हैं। उनका महंगा इन्वेस्टमेंट ग्राहकों के मुताबिक नहीं बैठता और उन्हें मजबूरन वापस लौटना पड़ता है।

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