Saturday, Jul 31, 2021
-->
harshvardhan said on vaccine it is not possible to vaccinate every adult right now prshnt

टीके की कमी पर स्वास्थ्य मंत्री की राज्यों को फटकार, कहा- कोरोना पर बंद करें राजनीति

  • Updated on 4/8/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन (Harshvardhan) ने महाराष्ट्र (Maharastra) और कुछ अन्य राज्यों पर बुधवार को हमला बोला और उनपर पर्याप्त पात्र लाभार्थियों को टीका लगाए बिना सभी के लिए टीकों की मांग कर लोगों में दहशत फैलाने तथा अपनी विफलताएं छिपाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि टीकों की कमी को लेकर महाराष्ट्र के सरकारी प्रतिनिधियों के बयान और कुछ नहीं बल्कि वैश्विक महामारी के प्रसार को रोकने की महाराष्ट्र सरकार की बार- बार की विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश है। हर्षवर्धन ने कहा कि जब राज्य 8 साल के ऊपर हर व्यक्ति को टीके की आपूर्ति के लिए कहें तब यह मान लेना चाहिए कि उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों, अग्रिम मोर्चे के कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नागरिकों को टीका देने का काम पूरा कर लिया है। 

RBI का अनुमान, वित्त वर्ष 2021-22 की पहली छमाही में 5.2% रहेगा खुदरा मु्द्रास्फीति

वैक्सीन की कमी के कारण बंद करने पड़े टीकाकरण केंद्र
गौरतलब है कि कई राज्यों ने यह मांग भी की है कि 18 साल से ऊपर के प्रत्येक व्यक्ति को यह टीका देने का विकल्प खोल दिया जाना चाहिए। इस पर उनका कहना था कि यह तभी संभव है जब प्राथमिकता वाले सभी लोगों को ये टीका लग जाए। दूसरी ओर, वैक्सीन की कमी को लेकर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार में ठन गई है। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि वैक्सीन की कमी से राज्य में कई टीकाकरण केंद्र बंद करने पड़े हैं और राज्य में टीके का सिर्फ तीन दिन का स्टॉक है। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्यमंत्री हर्षवर्धन ने राज्य सरकार के दावे को आधारहीन कहा है।  

नक्सल अटैकः साथी का खून रोकने को बलराज सिंह ने खोल दी अपनी पगड़ी, पढ़ें ये साहस भरी दास्तां

अनिवार्यता से छूट देकर महाराष्ट्र को खतरे में डाल रही सरकार
वर्धन ने कहा कि टीकों की कमी के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। महाराष्ट्र द्वारा की जा रही जांचें पर्याप्त नहीं हैं और संक्रमितों के संपर्क में आने वालों का पता लगाना भी संतोषजनक नहीं है। यह देखकर स्तब्ध रह जाते हैं कि राज्य सरकार निजी वसूली की खातिर लोगों को संस्थागत पृथकवास की अनिवार्यता से छूट देकर महाराष्ट्र को खतरे में डाल रही है। कुल मिलाकर, जैसा कि राज्य एक संकट से निकल दूसरे में पड़ रहा है, ऐसा लग रहा है कि राज्य नेतृत्व को अपनी जिम्मेदारियों की कोई ङ्क्षचता नहीं है। छत्तीसगढ़ के बारे में, उन्होंने कहा कि राज्य के नेता नियमित रूप से टिप्पणियां कर रहे हैं, ‘‘जिनका मकसद टीकाकरण पर गलत सूचना एवं आतंक फैलाना है।  

गुजरात में तेजी से बढ़ा कोरोना आंकड़ा, कोर्ट के सुझाव पर सरकार ने 20 शहरों में लगाया नाइट कर्फ्यू

महाराष्ट्र में बंटी है सिर्फ 14 लाख वैक्सीन खुराक
राज्य में जांच का तरीका ज्यादातर रेपिड एंटीजन पर निर्भर है जो कि सही रणनीति नहीं है। कई और राज्यों को भी अपने स्वास्थ्य तंत्रों को मजबूत करने की जरूरत है। उदाहरण के लिए, कर्नाटक, राजस्थान और गुजरात में जांच की गुणवत्ता में सुधार की जरूरत है। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि राज्य के पास कोविड-19 के टीके की 14 लाख खुराकें ही बची हुई हैं, जो तीन दिन ही चल पाएंगी और टीकों की कमी के कारण कई टीकाकरण केंद्र बंद करने पड़ रहे हैं। ऐसे टीकाकरण केंद्रों पर आ रहे लोगों को वापस भेजा जा रहा है क्योंकि टीके की खुराकों की आपूर्ति नहीं हुई है। 

राज्य को हर हफ्ते 40 लाख खुराकों की जरूरत है। रोजाना छह लाख लोगों का टीकाकरण करने की केंद्र की चुनौती हमने स्वीकार की थी। अब एक दिन में पांच लाख लोगों को टीकाकरण हो रहा है। इससे पहले महाराष्ट्र के प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) प्रदीप व्यास ने बताया था कि राज्य में अनेक जिलों में ‘आज या कल’ टीके खत्म हो जाएंगे और केंद्र को इस बारे में अवगत कराया गया है। 

NIA के समक्ष पेश हुए परमबीर सिंह, एंटीलिया केस में हो रही पूछताछ

ओडिशा ने भी 20 लाख डोज मांगीं
ओडिशा में भी वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अवर मुख्य सचिव पी के महापात्रा ने मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखकर राज्य में टीकाकरण सुचारू ढंग से चलाने के लिए कोविशील्ड की 15-20 लाख खुराक देने का अनुरोध किया था। राज्य में फिलहाल टीके की 35.67 लाख के करीब खुराक ही दी गयी है।

यहां पढ़े कोरोना से जुड़ी खबरें...

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.