Saturday, Jun 23, 2018

हरियाणाः कितना सही है खिलाड़ियों की जेब पर सरकार की नजर

  • Updated on 6/9/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। खट्टर सरकार ने दो दिन पहले नोटिफिकेशन जारी कर खिलाड़ियों को उनकी कमाई का 33% हिस्सा प्रदेश स्पोर्ट्स काउंसिल को देने की बात कही थी। हालांकि इस आदेश का भारी विरोध होने के बाद सरकार ने इसे वापस ले लिया। लेकिन ये आदेश कितना सही था, इसे लेकर अंग्रेजी अखबार इंडियन एेक्सप्रेस में एक एडिटोरियल छपा है।    

एडिटोरियल में कही गई ये बात-
हरियाणा सरकार ने प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए जो नोटिफिकेशन जारी किया था उसके मुताबिक प्रदेश के खिलाड़ियों को खेल और ऐनडॉर्समेंट के जरिए हो रही कमाई का 33% हिस्सा प्रदेश के स्पोर्ट्स काउंसिल को देने की बात कही थी। ये रुपये प्रदेश के खिलाड़ियों के विकास में इस्तेमाल किए जाने की बात कही थी। 

हालांकि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इसके माध्यम से 'गुड टैक्स पेयर्स' बनने का प्रलोभन दिया, लेकिन बढ़ते दबाव के बाद उन्होंने कहा कि इस आदेश की समीक्षा की जाएगी।

नोटिफिकेशन का विरोध करने वालों का तर्क है कि खट्टर सरकार ने जितने प्रतिशत रुपये की मांग की है उतना तो उधार देने वाले भी तूद के तौर पर नहीं मांगते और ना ही टैक्स वसूलने वाले इस तरह की बात करते हैं। आज के समय में तो खिलाड़ियों को अच्छा प्रदर्शन करने के लिए रिवॉर्ड दिए जाते हैं वहीं सरकार डोनेशन लेने की बात कर रही है।

पिछले 20 साल में ओलंपिक खेलों में खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम ऊंचा किया। अच्छे प्रदर्शन के कारण पिछली सरकार ने खिलाड़ियों को कैश प्राइस और बहुत से रिवॉर्ड दिए थे। वहीं खट्टर सरकार की खिलाड़ियों को ऐड और ईनाम के जरिए मिलने वाले रुपयों को इस तरह से वापस लेने की बात सही नहीं लगती है।

हरियाणा के खिलाड़ी हर बार अच्छा प्रदर्शन करते हैं और इस बात का अंदाजा हमें किसी भी बड़े टूर्नामेंट्स के खत्म होने का बाद उसकी मेडल टैली के जरिए हो जाता है। इसके चलते प्रदेश सरकार खिलाड़ियों में पुलिस की नौकरी भी देती है जिसमें खिलाड़ी रिटायर होने के बाद भी अपनी सेवाएं देते हैं।

खेल के लिए अपने जूनियर खिलाड़ियों को सुविधाएं उप्लब्ध कराना ये नामी खिलाड़ी का कर्तव्य है लेकिन इस कर्तव्य को याद दिलाने से पहले ये भी देखना चाहिए कि जब आज के ये नामी खिलाड़ी जूनियर लेवल पर थे तब इन्हें प्रदेश सरकार की तरफ से ना अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर मिलता था और ना ही स्पोर्ट्स साइंस के बारे में कुछ बताया जाता था।

दूसरी बात, प्रदेश सरकार खिलाड़ियों से खेल के लिए रुपये लेने की तो बात कर रही है लेकिन उन रुपयों का इस्तेमाल कैसे होना है इसका कोई प्लान सबूत के तौर पर मौजूद नहीं हैं।

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