रासौं और पांडव नृत्य के साथ निकली हाथी स्वांग की झांगी

  • Updated on 1/16/2019

उत्तरकाशी/ब्यूरो। विश्वनाथ की धरती पर हर बरस उमड‍़ने वाले माघ मेले के तीसरे दिन भूम्याळ कंडार देवता हाथी स्वांग झांकी अध्यात्मक को और अधिक गहरा कर गई। ढोल-दमाऊ के घमक पर रासौं और पांडौ नृत्य पर सैकड़ों लोग एक साथ नृत्य करते मणिकर्णिका घाट तक पहुंचे।

सीमांत जनपद उत्तरकाशी से बहती गंगा की पवित्र धारा के तट पर काशी विश्वनाथ स्वयं-भू शिवलिंग से ही गंगाघाटी से अध्यात्म की ऊर्जा पूरे देश में प्रवाहित होती है। इसी धरती पर सूर्य के मकर राशि में प्रवेश होने पर माघ मेला हर साल लगता है। कंडार भैरव को काशी का कोतवाल कहा गया है और शिव के साथ विशेष पूजनीय कंडार देवता का हाथी स्वांग विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। 

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बुधवार को बाड़ाहाट, लक्षेश्वर, पाटा, संग्राली व बग्याल गांव के लोग सुबह कलक्ट्रेट के पास स्थित कंडार देवता मंदिर पहुंचे। यहां से विधिवत हाथी स्वांग का आरंभ हुआ। सजावट के साथ हाथी का पुतला बनाया गया था व उसके आगे पांडवों के पश्वा नृत्य करते हुए चल रहे थे। भैरव चौक, विश्वनाथ चौक, रामलीला मैदान से होते हुए यह शोभायात्रा मणिकर्णिका घाट पहुंची। 

विभिन्न जगहों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर हाथी स्वांग का स्वागत किया। यहां पूजा अर्चना के बाद स्वांग का विसर्जन किया गया। पौराणिक इस परंपरा में बड़ी संख्या में बुजुर्ग भी शामिल रहे। रंगमर्की सुरेंद्र पुरी ने बताया कि प्राचीन परंपरा है और इन्हीं परंपराओं के चलते उत्तरकाशी पूरे देश में जानी जाती है। शोभायात्रा में जिला पंचायत अध्यक्ष जशोदा राणा, डीएम डा. आशीष चौहान, प्रसिद्ध फिल्म एक्टर व डायरेक्टर ओमुंग कुमार, एसडीएम देवेंद्र नेगी, अजय पूरी आदि शामिल रहे।

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