Wednesday, Apr 14, 2021
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राम मंदिर के खिलाफ बोलने वाले मोहम्‍मद नदीम को लगा झटका, HC ने खारिज की अग्रिम जमानत अर्जी

  • Updated on 4/7/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के सक्रिय पदाधिकारी मोहम्मद नदीम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। मोहम्मद नदीम पर अयोध्या (Ayodhya) में भगवान राम के मंदिर की आधारशिला रखने के खिलाफ बाराबंकी के कुर्सी इलाके में भाषण देते हुए धार्मिक भावनायें भड़काने का आरोप है।

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HC ने की PFI नेता की जमानत याचिका खारिज
अपने आदेश में न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह ने कहा कि संविधान में प्रदत्त बोलने के अधिकार का यह कतई तात्पर्य नहीं है कि दूसरे धर्म या समुदाय के खिलाफ बोला जाये और उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई जाये। यह आदेश अदालत ने मोहम्मद नदीम की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत अर्जी पर पारित किया। अर्जी का विरोध करते हुए अपर शासकीय अधिवक्ता (प्रथम) राजेश कुमार सिंह ने कहा कि अभियुक्त के खिलाफ विवेचना के दौरान इस बात के पर्याप्त साक्ष्य आये हैं कि वह पीएफआई का सक्रिय पदाधिकारी है और उसने दूसरे धर्म के लोगों को भड़काने वाला भाषण दिया।

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राम मंदिर के खिलाफ टिप्पणी करने का आरोप
सिंह ने अदालत को यह भी बताया कि पहले भी अभियुक्त ने इस प्रकार का अपराध किया था। दरअसल बाराबंकी की कुर्सी पुलिस ने अभियुक्त नदीम के खिलाफ धार्मिक भावनायें भड़काने व राम मंदिर के खिलाफ टिप्पणी करने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 153 (ए) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

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कोरोना को लेकर इलाहाबाद HC सख्त 
वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों पर चिंता प्रकट करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राज्य सरकार से रात्रिकालीन कर्फ्यू लगाने की संभावना तलाशने को कहा, ताकि सामाजिक कार्यक्रमों में भीड़भाड़ रोकी जा सके। मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।

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कोरोना नियमों का हो पालन- कोर्ट
अदालत ने कहा, 'हालांकि, राज्य सरकार ने कोविड-19 की दूसरी लहर के खतरे से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं, लेकिन देखने में आया है कि राज्य द्वारा जारी निर्देशों का लोगों द्वारा ढंग से पालन नहीं किया जा रहा और यह चिंता का विषय है।' पीठ ने जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से लोगों का शत प्रतिशत मास्क पहनना सुनिश्चित करने को कहा। अदालत ने कहा, 'जिला प्रशासन को यह देखना चाहिए कि पूरे प्रदेश में किसी भी जगह भीड़ एकत्रित ना हो।'

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पंचायत चुनाव में नहीं निकलेंगे जुलूस- HC
पंचायत चुनावों पर पीठ ने कहा कि चुनाव इस तरह से कराए जाएं कि कोई जुलूस ना निकले। अदालत ने कहा कि चाहे वह नामांकन हो, चुनाव प्रचार हो या मतदान हो, हर चरण में कोविड-19 के सभी नियमों का पालन किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा, 'राज्य सरकार केवल 45 वर्ष की आयु से ऊपर के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी के लिए टीकाकरण की संभावना तलाशे। वास्तव में घर-घर टीकाकरण करने का कार्यक्रम तैयार किया जाना चाहिए।' इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई आठ अप्रैल को की जाएगी।

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