Thursday, Jan 27, 2022
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दिल्ली में कोरोना टीकाकरण निराशाजनक, अब स्वास्थ्य दूत वैक्सीन को लेकर करेंगे भ्रम दूर

  • Updated on 1/21/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली में अब तक कोरोना का टीकाकरण (Corona vaccination) उम्मीद से बेहद कम हुआ है। स्वास्थ्यकर्मियों के मन में अब भी वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट है, जिसके कारण एसे स्वास्थ्यकर्मी भी टीका लगाने नहीं आ रहे हैं जिनका पंजीकरण वैक्सीन को लेकर हो चुका है। ऐसे में अब प्रशासन की ओर से नई पहल की जा रही है। वैक्सीन के  प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए अब स्वास्थ्य दूत तैनात किए जाएंगे।

इसके लिए हर जिले में तैयारी की जा रही है। अस्पतालों में इन स्वास्थ्य दूतों को तैनात किया जाएगा जो वैक्सीन से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करके लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए प्रेरित करेंगे। इसके साथ ही दिल्ली के सभी अस्पतालों के विभागाध्यक्ष और प्रमुख डॉक्टरों से भी अपील की जा रही है कि वो आगे आकर कोरोना का टीका लगवाएं ताकि उनको देख लोगों में भी वैक्सीन लगवाने की प्रेरणा जागे।

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सोशल मीडिया पर भी वैक्सीनेशन कैंपेन
इसके साथ ही सोशल मीडिय पर भी वैक्सीनेशन कैंपेन को शुरू करने का काम हो चुका है। अस्पतालों में सेल्फी बूथ भी तैयार किए जा रहे हैं। टीका लगवाने के बाद स्वास्थ्यकर्मी सेल्फी लेकर उसे सोशल मीडिया में पोस्ट करेंगे जिससे अन्य लोगों को भी वैक्सीन को लेकर एक अच्छा संदेश मिलेगा। 

वैक्सीन के प्रति स्वास्थ्यकर्मियों में तमाम आशंकाओं को दूर करने के लिए दिल्ली कैंसर इंस्टीट्यूट में बुधवार को मनोवैज्ञानिक परामर्श से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहीं दिल्ली मेडिकल काउंसिल ने भी ऑनलाइन वेबीनार आयोजित कर स्वास्थ्य कर्मियों के सवालों का जवाब दिया।

स्वास्थ्यकर्मियों से भावनात्मक अपील
दिल्ली कैंसर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ बीएल शेरवाल और दिल्ली मेडिकल काउंसिल अध्यक्ष डॉक्टर अरुण गुप्ता ने डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल कर्मचारियों से भावनात्मक अपील की है कि वह वैक्सीन लें और आगे कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए तैयार रहें।

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20 या इससे कम स्वास्थ्यकर्मी प्रतिदिन लगा रहे टीका
यहां बता दें कि दिल्ली के अस्पतालों में रोजाना 100 स्वास्थ्यकर्मियों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन अस्पताल में 1 दिन में केवल 20 या इससे कम स्वास्थ्यकर्मी टीका लगवा रहे हैं। दोनों ही विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर स्वास्थ्यकर्मियों को टीका नहीं लगेगा तो समाज में वैक्सीन को लेकर गलत संदेश जाएगा। लोगों में भ्रम की स्थिति और भी बढ़ जाएगी। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि वैक्सीन का हजारों लोग पर परीक्षण किया गया है क्या वह इंसान नहीं है? उन्होंने कहा कि तीसरे चरण के परीक्षण के परिणाम फरवरी में प्रकाशित होने की संभावना है। वहीं डॉक्टर अरुण गुप्ता ने कहा कि वैक्सीन लगने के बाद एंटीबॉडी विकसित होने में 2 महीने लग सकते हैं।

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