Friday, Dec 03, 2021
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80 या 35 साल के ब्लैक फंगस रोगी दोनों में से किसे मिले दवा? नीति तय करें केंद्र और दिल्ली सरकार- HC

  • Updated on 6/1/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली हाईकोर्ट ने कोरोना की जानकारी में इस्तेमाल होने वाली जांच और कोविड के बाद ब्लैक फंगस के शिकार रोगियों के उपचार में उपयोगी दवा के वितरण पर केंद्र और दिल्ली सरकार से नीति बनाने को कहा है। कोर्ट ने सोमवार को अलग-अलग मामलों में निर्देश भी जारी किया।

कोर्ट ने एक मामले में एचआरसीटी जांच की कीमत सीमित करने के अनुरोध संबंधी याचिका को प्रतिवेदन के रूप में लेने का निर्देश दिल्ली सरकार को दिया। वहीं ब्लैक फंगस रोधी दवा वितरण से जुड़ी याचिका पर उचित नीति बनाने को कहा है। हाई कोर्ट के न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायाधीश जसमीत सिंह की बेंच ने कहा कि यह वह गोली है जो आपको लेनी है और आपको यह जरूरी निर्णय करना है जो आसान काम नहीं है।

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एक व्यक्ति का जीवन दूसरे कम महत्वपूर्ण नहीं- कोर्ट 
बेंच ने स्पष्ट किया कि वह यह बिल्कुल नहीं कह रही है कि किसी एक व्यक्ति का जीवन किसी दूसरे से कम महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने केंद्र व दिल्ली सरकार से कहा कि वह ब्लैक संगत से पीड़ित रोगियों के उपचार में काम आने वाली दवा एम्फोटेरिसिन-बी के वितरण पर एक नीति तैयार करें।

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सरकार को लेना होगा ये जरूरी फैसला- HC 
कोर्ट ने कहा कि जब तक दवा की कमी है तब तकएक निश्चित आयु समूह श्रेणी के लोगों को बाहर करने का निर्णय सरकार करें। कोर्ट ने कहा कि यह निर्णय डॉक्टर पर ना छोड़ा जाए और इस संबंध में एक स्पष्ट नीति तैयार की जाए। कोर्ट ने कहा कि यदि 2 रोगी हैं, जिनमें से एक की उम्र 80 साल तथा एक उम्र 35 साल है और दवा की केवल एक ही खुराक है। तो यह किसे दी जानी चाहिए। यह जरूरी निर्णय आपको ही करना है। इसीलिए इस संबंध में दवा वितरण को लेकर एक नीति तैयार करें। 

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