Wednesday, May 18, 2022
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हाईकोर्ट का JNU को आदेश- जारी करें एमफिल और पीएचडी कोर्सों में दाखिले के नतीजे

  • Updated on 7/17/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) को निर्देश दिया कि वह अशक्त छात्रों के लिये नहीं भरी जा सकी पांच फीसदी सीटों को छोड़कर मौजूदा शैक्षणिक सत्र के लिये एमफिल और पीएचडी पाठ्यक्रमों में दाखिले के नतीजे तत्काल घोषित करे।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने कहा कि उसने पहले समूची प्रक्रिया पर नहीं बल्कि , एमफिल और पीएचडी पाठ्यक्रमों में सिर्फ अशक्त छात्रों के लिए नहीं भरी जा सकी पांच फीसदी सीटों के लिये दाखिले पर रोक लगाई थी।

पीठ ने कहा , ‘‘ आपने नतीजे क्यों घोषित नहीं किये हैं। हमने विश्वविद्यालय को अन्य नतीजे घोषित करने से नहीं रोका था। आप परिणाम घोषित करने के लिये बाध्य हैं।

अधिकारियों को तत्काल परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया जाता है। ’’अदालत नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में शैक्षणिक सत्र 2018-19 के लिये जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की दाखिला नीति को चुनौती दी गई है।याचिका में कहा गया है कि दाखिला नीति में साक्षात्कार को 100 फीसदी महत्व दिया गया है , जो अनुचित है।

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शोध के विभिन्न क्षेत्रों में करियर बनाने के इच्छुक कई छात्रों ने हस्तक्षेप के लिये आवेदन दायर किया। उन्होंने शैक्षणिक वर्ष 2018-19 के लिये एमफिल और पीएचडी में दाखिले और साक्षात्कार के नतीजों को घोषित करने में विलंब करने के जेएनयू के फैसले को चुनौती दी।जेएनयू की तरफ से केंद्र सरकार की वकील मोनिका अरोड़ा ने अदालत को सूचित किया कि 2018 की दाखिला प्रक्रिया के परिणाम घोषित नहीं किये गए हैं और अधिकारी अदालत के पास नतीजे लेकर आए हैं।इस पर अदालत ने विश्वविद्यालय से दाखिले के नतीजे घोषित करने को कहा। 

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